National Flag Day 2026: राष्ट्र ध्वज की कहानी
National Flag Day 2026: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपनाए गए कांग्रेस पार्टी के झंडे को ही थोड़ा बदलकर स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय ध्वज बनाया गया है, इसलिए कांग्रेस पार्टी इस खास दिन (22 जुलाई) को विशेष रुप से याद करती है और इसे अपना राजनीतिक विरासत बताती है!
एचएल दुसाध
न्यूज इंप्रेशन
Lucknow: आज 22 जुलाई है : राष्ट्रीय ध्वज दिवस! यह देश को अंग्रेजों से आजादी मिलने (15 अगस्त, 1947) से कुछ दिन पहले, 22 जुलाई, 1947 को संविधान सभा द्वारा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को अंगीकार किये जाने की याद में मनाया जाता है.भारत में राष्ट्रीय ध्वज दिवस किसी एक विशिष्ट राजनीतिक दल का त्यौहार नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय उत्सव है . इसे सभी राजनीतिक दलों के लोग राष्ट्र के प्रति सम्मान के रूप में मनाते हैं. पर, चूँकि राजनीतिक दृष्टिकोण से इसका इतिहास सीधे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तिरंगे से जुड़ा है: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपनाए गए कांग्रेस पार्टी के झंडे को ही थोड़ा बदलकर स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय ध्वज बनाया गया है, इसलिए कांग्रेस पार्टी इस खास दिन (22 जुलाई) को विशेष रुप से याद करती है और इसे अपना राजनीतिक विरासत बताती है! वहीँ वर्तमान सत्ताधारी पार्टी भाजपा ‘हर घर तिरंगा‘ जैसे राष्ट्रव्यापी अभियानों के जरिये तिरंगे को जन- जन से जोड़ने के लिए जानी जाती है. इस पार्टी के नेता और उद्योगपति नवीन जिदल तिरंगे को आम नागरिकों के लिए 365 दिन फहराने का अधिकार दिलाने में सक्रिय रहे हैं. संक्षेप में, हमारा राष्ट्र ध्वज किसी एक पार्टी की विचारधारा तक सीमित नहीं है, लेकिन सभी प्रमुख पार्टियां इसे अपनी – अपनी राजनीतिक और ऐतिहासिक विचारधारा के अनुसार अलग- अलग तरीकों से महत्त्व देती हैं! बहरहाल ऐसा नहीं कि राष्ट्रीत ध्वज दिवस सिर्फ भारत में मनाया जाता है, दुनिया में अन्य कई देश भी अपना राष्ट्रीय ध्वज दिवस मनाते हैं. आकड़ों के मुताबिक लगभग 46 देश अपने इतिहास में किसी न किसी रूप में झंडा दिवस (Flag Day) मनाते हैं. यह हर देश के अपने राष्ट्रीय इतिहास और संस्कृति पर निर्भर करता है. भारत में जहा हर साल 22 जुलाई को झंडा अंगीकरण दिवस मनाया जाता है, वहीँ अमेरिका में 3 सितम्बर को तो स्वीडेन में 6 जून को राष्ट्रीय ध्वज दिवस मनाया जाता है. भारत, अमेरिका सहित दुनिया के अन्य कई देशों में यह खास दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि राष्ट्र ध्वज किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र की संप्रभुता, पहचान और उसके गौरव का सर्वोच्च प्रतीक होता है!
राष्ट्र ध्वज का महत्त्व
यह एक ऐसा दृश्य माध्यम है जो देश के नागरिकों को आपस में जोड़ता है और उन्हें एक साझा इतिहास, संस्कृति और मूल्यों की याद दिलाता है . दुनिया में राष्ट्र ध्वज के प्रमुख महत्व को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है. राष्ट्र ध्वज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की स्वतंत्र पहचान का प्रतिनिधित्व करता है。 यह देश की सीमाओं में रहने वाले विभिन्न धर्मों, जातियों और भाषाओं के लोगों को एक सूत्र में बांधता है प्रत्येक ध्वज के रंग और प्रतीक उसके निर्माण के पीछे के संघर्षों और स्वतंत्रता संग्राम की गाथा बताते हैं。 उदाहरण के लिए, भारतीय तिरंगे का केसरिया रंग देश के लिए बलिदान और साहस का प्रतीक है。जब नागरिक अपने देश का झंडा फहराते हैं, तो उनके मन में राष्ट्र के प्रति सम्मान, प्रेम और कर्तव्यनिष्ठा (देशभक्ति) की भावना जागृत होती है. वैश्विक मंचों, जैसे कि संयुक्त राष्ट्र (United Nations), अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों या ओलंपिक खेलों (Olympic Games) में, राष्ट्र ध्वज ही किसी देश की उपस्थिति को दर्ज कराता है。 विजेताओं के सम्मान के समय राष्ट्र ध्वज का फहराया जाना सर्वोच्च सम्मान माना जाता है. ध्वज केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि देश के संविधान और सिद्धांतों का दर्पण होता है. उदाहरण के लिए, भारत के राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगे) के मध्य में स्थित ‘अशोक चक्र’ सत्य, शांति और निरंतर प्रगति (Dynamic Progress) का प्रतीक है!
जहां तक भारत के राष्ट्र ध्वज : ‘तिरंगा’ का सवाल है, यह केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता, स्वतंत्रता और सांस्कृतिक मूल्यों का सर्वोच्च प्रतीक है. यह पूरी दुनिया में भारत के गौरव, शांतिप्रियता और अटूट एकता का प्रतिनिधित्व करता है. दुनिया भर में भारतीय राष्ट्र ध्वज का महत्व निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है! जब तिरंगा विदेशी धरती, खेल के मैदानों (जैसे ओलंपिक), या अंतरिक्ष अभियानों में फहराता है, तो यह विश्व पटल पर भारत की स्वतंत्र और शक्तिशाली छवि प्रस्तुत करता है. यह झंडा उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की याद दिलाता है जिन्होंने भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराने के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए. इसके तीन रंग देश के मूल आदर्शों को दर्शाते हैं: केसरिया साहस और त्याग का, सफेद सत्य और शांति का, तथा हरा समृद्धि और विश्वास का. सफेद पट्टी के मध्य में स्थित 24 तीलियों वाला अशोक चक्र न्याय, धर्म और देश की निरंतर प्रगति (गतिशीलता) का प्रतीक है. तिरंगा भारत के सभी धर्मों, जातियों और संस्कृतियों को एक सूत्र में बांधता है, जो विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की विविधता में एकता का संदेश देता है. भारत सरकार द्वारा जारी ध्वज संहिता (Flag Code of India) के अनुसार, प्रत्येक भारतीय नागरिक को पूरे सम्मान के साथ अपने घरों और कार्यस्थलों पर तिरंगा फहराने का अधिकार है. इसके सम्मान की रक्षा करना सभी भारतीयों का प्रथम कर्तव्य है।
राष्ट्र ध्वज (तिरंगा) का सम्मान बनाए रखने के लिए: किन बातों का रखना है ध्यान
राष्ट्र ध्वज (तिरंगा) का सम्मान बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि इसे कभी जमीन या पानी से न छूने दें, हमेशा केसरिया पट्टी ऊपर रखें, और कभी भी फटे-पुराने झंडे का इस्तेमाल न करें। झंडे को पोशाक, रुमाल या सजावट के रूप में इस्तेमाल करना कानूनी अपराध है. राष्ट्र ध्वज के प्रति सम्मान प्रकट करना हर भारतीय का मूल कर्तव्य (Fundamental Duty) है, जो हमारे संविधान के अनुच्छेद 51A(a) में भी स्पष्ट रूप से वर्णित है। भारतीय ध्वज संहिता 2002 (Flag Code of India) के अनुसार, तिरंगे की गरिमा और सम्मान के लिए निम्नलिखित बातों का पालन करना अनिवार्य है! पहला ,तिरंगा हाथ से कता या बुना हुआ, अथवा मशीन से बना होना चाहिए. यह खादी, सूती, पॉलिएस्टर, ऊन या रेशम का हो सकता है. इसका आकार आयताकार और लंबाई-चौड़ाई का अनुपात 3:2 होना चाहिए.दूसरा, झंडा हमेशा सम्मान की स्थिति में सबसे ऊपर होना चाहिए. केसरिया रंग हमेशा सबसे ऊपर (या क्षैतिज प्रदर्शन में दाईं ओर) होना चाहिए. इसे कभी भी उल्टा नहीं फहराया जाना चाहिए. तीसरा, तिरंगे को किसी भी प्रकार की पोशाक, यूनिफॉर्म, कुशन, रुमाल या पर्दों के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.झंडे पर किसी भी तरह का स्लोगन, नारा या चित्र बनाना मना है. इसका प्रयोग किसी वस्तु या मूर्ति को लपेटने या ढंकने के लिए नहीं किया जा सकता. चौथा , यदि झंडा फट जाए या मैला हो जाए, तो उसे नष्ट नहीं किया जाना चाहिए. उसे पूरी तरह से एकांत में, झंडे की गरिमा को ध्यान में रखते हुए या तो मर्यादित तरीके से जलाकर या फिर जमीन में ससम्मान दफनाकर नष्ट किया जाना चाहिए. यह भी ध्यान रखना जरुरी है कि राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत राष्ट्र ध्वज का अनादर करने, उसे जलाने, कुचलने या मौखिक/लिखित रूप से अपमानित करने पर 3 साल तक की जेल या जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है!
भारत के राष्ट्र ध्वज का इतिहास
बहरहाल आज जब हम राष्ट्रीय ध्वज दिवस मनाने जा रहे हैं, तब इसके इतिहास का एक बार सिंहावलोकन कर लेना चाहिए! भारत के राष्ट्र ध्वज ‘तिरंगे’ का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली कहानी है. वर्तमान स्वरूप तक पहुँचने के लिए इसे कई परिवर्तनों से गुजरना पड़ा.भारतीय राष्ट्र ध्वज के इतिहास के प्रमुख पड़ाव निम्नलिखित हैं! पहली बार 7 अगस्त 1906 को कलकत्ता (अब कोलकाता) के पारसी बागान स्क्वायर में पहला अनौपचारिक ध्वज फहराया गया था. इसमें लाल, पीली और हरी तीन क्षैतिज पट्टियाँ थीं, जिस पर ‘वंदे मातरम’ लिखा हुआ था. 1907 में मैडम भीकाजी कामा और उनके साथियों ने जर्मनी में भारतीय झंडा फहराया. यह विदेशी धरती पर फहराया जाने वाला पहला भारतीय ध्वज था. इसके बाद डॉ. एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने 1917 के होम रूल आंदोलन के दौरान एक नया झंडा अपनाया, जिसमें लाल और हरी पट्टियाँ थीं और कोने पर यूनियन जैक था.इसकी अगली कड़ी में 1921 आंध्र प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया ने महात्मा गांधी को एक झंडे का डिज़ाइन सौंपा, जिसमें लाल और हरा रंग था. बाद में इसमें शांति और अन्य समुदायों के प्रतीक के रूप में सफेद पट्टी और चरखा जोड़ा गया. इसके बाद 1931 में कांग्रेस समिति की कराची बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर पिंगली वेंकैया द्वारा डिजाइन किए गए झंडे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया गया. इसमें लाल रंग की जगह केसरिया रंग शामिल किया गया.22 जुलाई 1947 (वर्तमान तिरंगा) को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की अध्यक्षता में भारतीय संविधान सभा ने इसके वर्तमान स्वरूप में राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया. इस विषय में पंडित जवाहरलाल नेहरु ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा था,’ यह संकल्प लिया गया है कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज गहरे केसरिया(केसरी), सफ़ेद और गहरे हरे रंग का समान अनुपात में क्षैतिज तिरंगा होगा. सफ़ेद पट्टी के बीच में चरखे को दर्शाने के लिए एक चक्र होगा. इस चक्र का डिजायन अशोक के सारनाथ सिंह स्तम्भ पर बने चक्र जैसा होगा. चक्र का व्यास सफ़ेद पट्टी की चौड़ाई के लगभग बराबर होगा. ध्वज की चौड़ाई और लम्बाई का अनुपात सामान्यतः 2; 3 होगा.’ संविधान सभा ने नेहरु के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, जिससे ब्रिटिश शासन के अंत के साथ स्वतंत्रता और भविष्य की समृद्धि के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई!
(लेखक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के विचार विभाग के चेयरमैन हैं )
