FIR Against Rahul Gandhi: राहुल गांधी ने खड़ा कर दिया: संविधान बनाम मनुस्मृति का मुद्दा !

FIR Against Rahul Gandhi: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड में एफआईआर दर्ज होने के बाद से भारतीय राजनीति में भूचाल सा आ गया है, वास्तव में राहुल गांधी पर एफआईआर दर्ज करा कर भाजपा बुरी तरह फंस गई है.

 

एच. एल. दुसाध

Lucknow: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड में एफआईआर दर्ज होने के बाद से भारतीय राजनीति में भूचाल सा आ गया है, जिसमें भाजपा की स्थिति का आंकलन करते हुए राजनीतिक विश्लेषकों के मन में ‘आ बैल मुझे मार’; ‘विनाश काले, विपरीत बुद्धि’ या ‘जब गीदड़ की मौत आती है तो वह शहर की और भागता है’ जैसी कहावतें उभर रही हैं. वास्तव में राहुल गांधी पर एफआईआर दर्ज करा कर भाजपा बुरी तरह फंस गई है. पहले से ही भाजपा के खिलाफ आरपार की लड़ाई का तेवर अख्तियार कर चुके कांग्रेसियों को इस घटना ने और ज्यादा आंदोलित कर दिया है, इसका साक्ष्य इस लेखक को 31 अगस्त शाम लखनऊ के कांग्रेस मुख्यालय में देखने को मिला. कांग्रेस अध्यक्ष अजय के नेतृत्व में भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मूसलाधार बारिश की उपेक्षा कर सडकों पर उतर आए. अगले दिन उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ की ओर ने फिर बारिश में भींगते हुए विधानसभा के बगल में विशाल धरना प्रदर्शन कर दिया. इन पंक्तियों के लिखे जाने के दौरान सांसद तनुज पुनिया के नेतृत्व में अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ का धरना अब भी जारी है और यह कब ख़त्म होगा, कहना मुश्किल है. संभवतः राहुल गांधी पर दर्ज एफआईआर से आक्रोशित होकर ही कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मछली भोज मामले में योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मानहानि का केस दायर कर दिया. काग्रेसियों का यह विरोध प्रदर्शन उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में बढ़ता ही जा रहा है. इस घटना के बाद पूरे देश में कांग्रेस कार्यकर्त्ता सड़क पर उतर आए हैं और पुलिस को जवाब देते नहीं बन रहा है. भाजपा ने कल्पना से परे विचित्र कदम उठा लिया है. ऐसा पहली बार हो रहा कि जो शिकायतकर्ता है, उसी पर एफआईआर दर्ज हो गया. जिसके पिता ने एससी/ एसटी उत्पीड़न निवारण एक्ट : 1989 लागू कर दलितों को समर्थ हिन्दुओ के अत्याचार से बचने का कानूनी हथियार दिया; जो व्यक्ति दलित, आदिवासी,पिछड़ों को देश की टॉप टेन कंपनियों का मालिक और मैनेजर, प्राइवेट यूनिवर्सिटीज का वीसी, मीडिया और अख़बारों का मालिक , ठेकेदार और सप्लायर बनाने के लिए दिन रात एक किए जा रहा है,जो व्यक्ति देश के टॉप दलित नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ हुई घटना के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए अड़ गया हो,वैसे जननायक राहुल गांधी के खिलाफ जुल्मी भाजपाइयों द्वारा एफआईआर दर्ज कराने से दलित समुदाय में भाजपा के खिलाफ आक्रोश का सैलाब पैदा हुआ है, जो बढ़ता ही जा रहा है !

देश मनुस्मृति से नहीं, संविधान से चालेगा

इस आक्रोश का बड़ा बलिष्ठ प्रतिबिम्बन दिल्ली में हुआ, जहां कांग्रेस नेता और आल इंडिया असंगठित कामगार कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. उदित राज और दलितों की मुखर आवाज प्रो. रतनलाल ने 1 सितम्बर को आरएसएस मुख्यालय’केशव कुंज ’ के बाहर मनुस्मृति की प्रतियाँ और आरएसएस की प्रतीकात्मक पोशाक जलाई.इस विरोध प्रदर्शन के दौरान डॉ उदित राज और उनके साथियों ने ‘ देश मनुस्मृति से नहीं, संविधान से चालेगा ‘ के नारे लगाये. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए डॉ. उदित राज और उनके कई समर्थकों को हिरासत में ले लिया. हिरासत में लिए जाने के बाद डॉ. उदित राज ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष खडगे का अपमान और राहुल गांधी पर दर्ज एफआईआर दलित समाज और संवैधानिक मूल्यों पर हमला है, और वे समानता व न्याय के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे! इस घटना को अधिकांश राजनीतिक विश्लेषक देश में दलित और सामाजिक न्याय की राजनीति को एक नया मोड़ देने वाला कदम करार दे रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस पार्टी इस पूरे घटना को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और दलित समुदाय के अपमान के रूप में देख रही है. राहुल गांधी ने जिस तरह इस मुद्दे को उठाया ,उससे कांग्रेस ने भाजपा पर वैचारिक रूप से सीधे हमला बोल दिया है. विशेषज्ञों का कहना है कि राहुल गांधी पर एससी/ एसटी एक्ट और अन्य धाराओं में मुक़दमा दर्ज होने से कांग्रेस को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा मिल गया है. पार्टी इसे राष्ट्रीय स्तर पर दलितों के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन के रूप में प्रचारित कर रही है. कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि राहुल गांधी इस पूरे घटनाक्रम पर एक सोची-समझी रणनीतिक चुप्पी या ‘ वेट एंड वाच’ नीति अख्तियार कर रखी है . वहीँ कुछ विश्लेषकों के अनुसार , भाजपा इस एफआईआईआर और विवाद के जरिए यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि कांग्रेस केवल जातिगत ध्रुवीकरण और राजनीति कर रही है, जबकि असल मामला रैली के बाद मैदान की साफ़- सफाई और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा था.’ बहरहाल भाजपा जितना भी सफाई दे कि हल्द्वानी के जिस मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की सभा के बाद की गई शुद्धिकरण का मामला मैदान की साफ़- सफाई और धार्मिक भावना से जुड़ा है , लेकिन दलित समाज में यह संदेश चला गया है कि इन घटनाओं के पीछे भाजपा की मनुवादी सोच क्रियाशील है और वह संविधान के उपर मनुस्मृति को तरजीह देती है!

विचारधारा खत्म, संघ खत्म, इसीलिए राहुल आक्रमण पर 

बहरहाल यह जानते हुए भी कि इससे दलित समाज आक्रोशित होगा फिर क्यों भाजपा ने राहुल गांधी पर एफआईआर दर्ज करने जैसा आत्मघाती कदम उठाया, इसका अनुमान सोशल मीडिया पर सक्रिय मोहम्मद जाहिद के इस पोस्ट से लगाया जा सकता है. उन्होंने लिखा है ,’ राहुल गांधी पर एफआईआर दर्ज हो गई है, हालांकि यह एफआईआर तकनीकी रूप से ही फुस्स है , 10 अगस्त को हुई घटना 11 अगस्त की बताकर शिकायत की गई है… जबकि 11 अगस्त को ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं… मगर एफआईआर हो गयी. राहुल गांधी पर हुआ एससी / एसटी का मुकदमा उनके लिए मास्टर स्ट्रोक हो सकता है यदि वह इसका फायदा उठाएं, और अग्रिम जमानत लेने की बजाय खुद लाव लश्कर के साथ जाकर अपनी गिरफ्तारी दें. एससी / एसटी समाज को छुआछूत के खिलाफ बोलने पर प्रताड़ित किए जाने का संदेश दें…. मुद्दे को बड़ा बनाएं.2014 के पहले राहुल गांधी पर एकमात्र एफआईआर थी जो चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की थी और 20 फरवरी 2012 को कैंट पुलिस स्टेशन, कानपुर में विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी के रोड शो पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगा और आईपीसी 188, 283 और 290 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद बाकी 38 एफआईआर पिछले 12 सालों में तब दर्ज हुई जब राहुल गांधी ने सरकार बनाने की बजाय संघ की विचारधारा को हराने को अपना मुख्य उद्देश्य बनाया. आप आंकड़े उठाकर देख लीजिए, इसके पहले राहुल गांधी पर उस 1 के अतिरिक्त और कोई एफआईआर नहीं थी। राहुल गांधी ने जब से संघ के आइडियोलॉजिकल पितृ पुरुष सावरकर और संघ की विचारधारा से सीधे लड़ने का ऐलान किया, उनपर धड़ाधड़ एफआईआर होने लगी. दरअसल राहुल गांधी का मकसद सिर्फ सरकार बनाना होता तो भी यह सब एफआईआर नहीं होतीं, संघ के लिए सरकार से अधिक महत्वपूर्ण है विचारधारा का ज़िंदा रहना, इनकी सरकारें इसी के बल पर बनती रहती हैं। विचारधारा खत्म, संघ खत्म,  इसीलिए राहुल गांधी आक्रमण पर हैं, और यह इस देश में पिछले 100 सालों के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि कोई संघ और उसकी विचारधारा को सीधे- सीधे चुनौती दे रहा है, देश से लेकर विदेशी मंच से दे रहा है।यही कारण है कि मोहन भागवत को न्यूयॉर्क में मुसलमानों से इलू–इलू करना पड़ा. यह संघ को लेकर राहुल गांधी के बनाए नरेटिव का परिणाम है.दरअसल सत्ता और विचारधारा में एक को डूबने से बचाना हो तो संघ विचारधारा को बचाएगा , राहुल गांधी उसी विचारधारा को डुबोने के लिए लड़ रहे हैं.यह इस देश में पहली बार कोई लड़ रहा है।‘तो राहुल गांधी पर एफआईआर का कारण उनका संघ पर अभूतपूर्व वैचारिक हमला है!

देश में दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई चल रही है.

बहरहाल वैसे तो राहुल गांधी पिछले काफी समय से अपने वैचारिक हमलों से संघ और भाजपा को असहज करते रहे हैं, किन्तु 22 अगस्त, 2026 को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ प्रोग्राम से हमला और तेज कर दिया है. पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान ‘मनुस्मृति’ और उस पर आधारित पितृसत्तात्मक सोच पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा था कि महिलाएं किसी की संपत्ति नहीं हैं और वे अपने पिता, पति या पुत्र की अधीनता में रहने के लिए नहीं बनी हैं, बल्कि उनका अपना स्वतंत्र वजूद होता है। उन्होंने मनुस्मृति के एक श्लोक (9.3) का हवाला देते हुए कहा था कि इसमें महिलाओं को बचपन में पिता, युवावस्था में पति और पति की मृत्यु के बाद पुत्र के अधीन रहने की बात कही गई है, जिसे उन्होंने महिलाओं की स्वतंत्रता के खिलाफ और शर्मनाक बताया.  उन्होंने छात्रों से पितृसत्ता (patriarchy) को तोड़ने और ऐसी पुरानी सोच को खारिज करने का आह्वान किया था। तब भाजपा और कई अन्य नेताओं ने राहुल गांधी के पुणे वाले बयान को हिंदू संस्कृति, परंपराओं और सनातन धर्म पर हमला करार दिया था। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी राजनीतिक फायदे के लिए हिंदू ग्रंथों को चुनिंदा तरीके से पेश कर रहे हैं। उनके बयान के बाद देश के कई संतों और धर्माचार्यों ने तीखी नाराजगी जताई, और कांग्रेस पार्टी तथा राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन व कानूनी शिकायतें भी दर्ज कराई गईं। दूसरी ओर, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और महिला इकाई ने राहुल गांधी के रुख का समर्थन करते हुए कई जगहों पर इसके विरोध में प्रदर्शन किए और संविधान के अधिकारों को सर्वोपरि बताया था. पुणे से मनुस्मृति के खिलाफ उठी आग अभी ठंढी भी नहीं हुई थी कि राहुल गांधी ने 29 अगस्त को दिल्ली में हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले पर प्रेस कांफ्रेंस करके संघ- भाजपा को और आक्रोशित कर दिया. अगर पुणे के छात्रों की गूँज के केंद्र में मनुस्मृति की शिकार आधी आबादी रही , तो 29 अगस्त के दिल्ली प्रेस कांफ्रेंस के केंद्र में दलित! 29 अगस्त को राहुल गांधी ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हुई ‘शुद्धिकरण’ की घटना की निंदा करते हुए कहा था, ’देश में दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई चल रही है. एक जो जाति के आधार पर भेदभाव और उंच-नीच को जिन्दा रखना चाहती है. दूसरी, जो संविधान के आधार पर समानता और सम्मान की लड़ाई लड़ रही है. हमारी लड़ाई स्पष्ट है : जातिवाद नहीं, न्याय चाहिए. छुआछूत नहीं, बराबरी चाहिए! देश में हर दलित व्यक्ति का जन्म से मृत्यु तक , हर जगह ,हर कदम ,अपमान किया जाता है. दलितों को गाँव के कुएं में पानी नहीं पीने दिया जाता , स्कूलों में दलित बच्चों से सफाई कराई जाती है, ये अपराध बीजेपी- आरएसएस करवाते हैं. एक दलित व्यक्ति जितना अधिक सफल होता है , उस पर उतने ही अधिक हिंसक हमले होते है. करोड़ों लोगों के साथ यह हर दिन होता है. जब हमारे राजस्थान सीएलपी(कांग्रेस विधायक दल ) के नेता टीकाराम जूली किसी मंदिर में जाते हैं, तो भाजपा के नेता शुद्धिकरण अनुष्ठान करते हैं. जब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी किसी मंदिर में जाते है, तो वहां भी शुद्धिकरण किया जाता है. जब कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे , जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा में समर्पित कर दिया , जव वे हल्द्वानी के रामलीला मैदान में भाषण देने जाते हैं तो वहां भी शुद्धिकरण किया जाता है. यह सब भाजपा- आरएसएस के लोग करते हैं , और यह भारत के संविधान के अनुसार अपराध है. ऐसे में जो लोग 10 अगस्त के शुद्धिकरण में शामिल रहे उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो. हम कांग्रेस अध्यक्ष के लिए न्याय की मांग करते हैं.यह केंद्र और राज्य सरकारों का कर्तव्य है कि वे सुनिश्चित करें कि खडगे को न्याय मिले!’

इस मामले में गिरफ्तारी देने के लिए खुद आतुर हैं

29 अगस्त के प्रेस कांफ्रेंस में राहुल गांधी ने जिस दृढ़ता के साथ एकाधिक बार कहा कि आज नहीं तो कल एफआई दर्ज करना ही होगा, उससे साफ लग गया कि वह 21 अगस्त, 2026 का इतिहास फिर दोहरा सकते हैं, जब उनके 6 से 7 घंटे चले लम्बे धरने के दबाव में आकर दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के शिकार हुए 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचब की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की थी. राहुल गांधी दिल्ली का इतिहास हल्द्वानी में दोहराकर मोदी सरकार को फिर झुकने के लिए मजबूर न कर दें, इसलिए ही उत्तराखंड पुलिस ने 30 अगस्त को उनके खिलाफ हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान पर उनकी टिपण्णी के सम्बन्ध में एफआईआर दर्ज कर लिया, जब संघ- भाजपा से जुड़े अनुसूचित जाति के एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उनकी टिप्पणियों से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची है. बहरहाल राहुल गांधी एफआईआर से घबराने के बजाय इसे अपनी छाती पर लगे मेडलों में एक और मैडल के रूप में लिया है. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक वह इस मामले में गिरफ्तारी देने के लिए खुद आतुर हैं. लेकिन भाजपा जानती है कि गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थन में दलित – बहुजनों का जो सैलाब उमड़ेगा, उसका सामना करना कठिन हो जायेगा. इसलिए मोदी सरकार अनिर्णय की स्थिति में पड़ी हुई है. लेकिन शुद्धिकरण मामले में राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर का नतीजा जो भी हो : आजाद भारत में राहुल गांधी पहली बार ‘मनुस्मृति बनाम संविधान’ का मुद्दा जोरदार तरीके से खड़ा करने में सफल हो गए हैं.इसके बाद भारत समाज के दो वर्गों : एक, मनुस्मृति और दूसरा, संविधान समर्थक खेमों में बंटने के हालात पैदा हो गए हैं. इसके बाद मनुस्मृति को लेकर बहस तेज होगी. सभी जानते है कि संघ की स्थापना मनुस्मृति आधारित समाज व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए हुई थी. संघ से जुड़े तमाम नायकों का सपना हिन्दू राष्ट्र की आड़ में मनुस्मृति का विधान लागू करना रहा है. मनुस्मृति का राज लाने के लिए ही संघ प्रशिक्षित प्रधानमंत्रियों: अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी ने सरकारी कंपनियों/ संस्थाओं को निजी हाथों में देने में सर्वशक्ति लगाया, इसी मकसद से नई- शिक्षा नीति : 2020 लागू की गई; इसी मकसद से ईडब्लूएस आरक्षण और लैटरल इंट्री का प्रावधान रचित हुआ. लेकिन संघ- भाजपा की समस्त गतिविधियों का प्रधान लक्ष्य मनुस्मृति का विधान लागू करना रहा है,इस सत्य से आमजन अनजान रहे. अब जबकि राहुल गांधी के सौजन्य से संविधान बनाम मनुस्मृति का मुद्दा बड़ा आकार धारण करने जा रहा है, आमजन भी जान जाएंगे कि भाजपा घोर मनुवादी पार्टी है, जिसकी समस्त गतिविधियों का चरम लक्ष्य मनुस्मृति के विधानों का अनुसरण करते हुए हिन्दू ईश्वर के उत्तमांग(मुख- बाहु- जंघे ) से जन्मे 7-8% संख्या के स्वामी उच्च वर्ण पुरुषों के हाथ में शक्ति के समस्त स्रोत(आर्थिक-राजनीतिक- शैक्षिक – धार्मिक) सौंपना है!और आमजन के बीच उसका मनुवादी चेहरा उजागर होते ही संघ के हिन्दू राष्ट्र का सपना चकनाचूर हो जायेगा!

 (लेखक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के विचार विभाग के चेयरमैन हैं. संपर्क-9654816191)

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