Delhi News: दिल्ली में पैलेट गन के इस्तेमाल की सरकारी पुष्टि, दिल्ली के अफसर के आदेश पर था चलाया गया
Delhi News: बीते 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार करने के कुछ ही दिनों बाद, दिल्ली पुलिस का यह दावा सवालों के घेरे में आ गया है।
न्यूज इंप्रेशन
Delhi : बीते 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार करने के कुछ ही दिनों बाद, दिल्ली पुलिस का यह दावा सवालों के घेरे में आ गया है। इस प्रदर्शन में कम से कम चार लोग पैलेट लगने से घायल हुए थे। पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में दर्ज एक जनरल डायरी प्रविष्टि से खुलासा हुआ है कि रैपिड एक्शन फोर्स ने दिल्ली पुलिस के एक पुलिस उपायुक्त स्तर के अधिकारी के मौखिक व लिखित निर्देशों पर एंटी-रॉयट गन से दो राउंड पेलेट दागे थे। इस जनरल डायरी प्रविष्टि को रैफ द्वारा घटना के बाद तड़के 1:24 बजे दर्ज किया गया था। इस आधिकारिक प्रविष्टि के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी के हिंसक होते विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए, डीसीपी के आदेश पर आरएएफ के डिप्टी कमांडेंट ने एंटी-रॉयट गन से 55 राउंड नॉन-इलेक्ट्रिकल शेल, 15 राउंड इलेक्ट्रिकल शेल, पांच टियर स्मोक ग्रेनेड (आंसू गैस के गोले), और प्लास्टिक पेलेट वाले बैलिस्टिक कारतूस का उपयोग करके दो राउंड फायर किए।
पैलेट गन का पहला दर्ज किया गया प्रयोग
यह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में निहत्थे और गैर-हथियारबंद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन का पहला दर्ज किया गया प्रयोग है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट रूप से किसी भी प्रकार की पेलेट गन का इस्तेमाल करने से इनकार किया था, लेकिन इस नई प्रशासनिक रिपोर्ट और पुलिस डायरी के सार्वजनिक होने से पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गौरतलब है कि देश की राजधानी में असंतोष दबाने और भीड़ नियंत्रण के लिए इतने घातक उपकरणों के इस्तेमाल का मामला अब काफी तूल पकड़ चुका है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के रवैये की कड़ी आलोचना
सर्वोच्च न्यायालय वर्तमान में प्रदर्शनकारियों और आम नागरिकों के खिलाफ पुलिस द्वारा किए जाने वाले अनुपातिक से अधिक और असंतुलित बल प्रयोग को लेकर दायर कई महत्वपूर्ण याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।
इस खुलासे के बाद मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों ने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय के रवैये की कड़ी आलोचना की है। विशेषज्ञों का मानना है कि पैलेट गन जैसे हथियारों का इस्तेमाल मुख्य रूप से अत्यधिक संवेदनशील परिस्थितियों में किया जाता है, और शांतिपूर्ण राजनीतिक प्रदर्शनों में इसका प्रयोग सुरक्षा एजेंसियों की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने की जनरल डायरी में दर्ज यह प्रविष्टि अदालत में जारी सुनवाई के दौरान भी एक महत्वपूर्ण और निर्णायक दस्तावेज साबित हो सकती है।
