Congress’s Brahmastra : कांग्रेस का ब्रह्मास्त्र, न्याय स्तम्भ और जाति जगगणना 

Congress’s Brahmastra : राजनीतिक सन्दर्भ में कांग्रेस का मारणास्त्र (ब्रह्मास्त्र या सबसे बड़ा हथियार) उसके पांच न्याय स्तम्भ (Pillars ) और जाति जगगणना( Caste Census ) को मांग को माना जाता है. चुनाव और राजनीतिक अभियानों में पार्टी इन मुद्दों को अपने सबसे प्रमुख चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल करती है.

लेखक: एचएल दुसाध

न्यूज इंप्रेशन 

Delhi: आज की तारीख में यदि कांग्रेस कार्यकर्ताओं से पूछा जाए कि पार्टी का राजनीतिक ब्रह्मास्त्र क्या है, बमुश्किल 100 में दो तीन लोग ही सही जवाब दे पाएंगे. लेकिन यही सवाल यदि गूगल से पूछा जाय तो मोबाइल स्क्रीन पर यह जवाब दिखेगा!‘ राजनीतिक सन्दर्भ में कांग्रेस का मारणास्त्र (ब्रह्मास्त्र या सबसे बड़ा हथियार) उसके पांच न्याय स्तम्भ (Pillars ) और जाति जगगणना( Caste Census ) को मांग को माना जाता है. चुनाव और राजनीतिक अभियानों में पार्टी इन मुद्दों को अपने सबसे प्रमुख चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल करती है. कांग्रेस के इन प्रमुख वैचारिक और चुनावी हथियारों का विवरण इस प्रकार है . 1-युवा न्याय: बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार और भत्ते के अवसर; 2- नारी न्याय: महिलाओं को आर्थिक सहायता और सुरक्षा; 3- किसान न्याय : न्यूनतम समर्थन मूल्य की(Msp) की क़ानूनी गारंटी और कर्ज माफ़ी; 4- श्रमिक न्याय : असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा तथा 5- हिस्सेद्दारी न्याय : समाज के हर वर्ग को आबादी के अनुपात में हक़ दिलाना(जिसके तहत ही जातिगत जनगणना की मांग की जाती है ). संविधान और लोकतंत्र का रक्षा नैरेटिव : कांग्रेस लगातार भाजपा सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाती है और ‘ संविधान बचाओ ‘ के नारे को अपने मुख्य रचनात्मक व आक्रामक हथियार के रूप में रूप में इस्तेमाल करती है . दूसरी तरफ विरोधी दलों ( जैसे भाजपा) का आरोप है कि कांग्रेस का वास्तविक हथियार ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति, परिवारवाद और नकारात्मक नैरेटिव है!’

ब्रह्मास्त्र की उपयोगिता को भूलते, कांग्रेस कार्यकर्त्ता

तो गूगल को स्पष्ट पता है कि कांग्रेस का सबसे बड़ा चुनावी हथियार या ब्रह्मास्त्र क्या है, पर आज की तारीख में इसकी जानकारी बहुत कम कांग्रेस कार्यकर्ताओं को है, इसका प्रमाण एक बार फिर इस लेखक को 18 सितम्बर की दोपहर कानपुर में मिला. उस दिन दो बजे से कानपूर जिला कार्यालय के ‘तिलक हॉल’ में विचार विभाग की एक संगोष्ठी होनी थी ,जिसमें मुझे शिरकत करना था. किन्तु आयोजकों के अनुरोध पर घंटे पूर्व विचार विभाग के कानपुर जिलाध्यक्ष के आवास पर चाय पानी के लिए पहुंचना पड़ा, जहां शहर के क्रीम लोग पहले से उपस्थित मिले. परस्पर परिचय विनिमय के बाद नाश्ता लेते हुए चर्चा का दौर चालू रहा. ऐसा नहीं कि वहां उपस्थित सभी कांग्रेसी ही थे: नहीं बाहुल्यता कांग्रेसियों की जरुर रही पर, उनमें कुछ सपा और दलित संगठनों से जुड़े लोग भी थे. किन्तु जितने भी लोग उपस्थित रहे, सब में भाजपा शासन से निजात पाने की तीव्र ललक रही . आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा शासन से कैसे निजात मिलेगी,यह वे दिल्ली से आए एआईसीसी के विचार विभाग के चेयरमैन से जानने के लिए उत्सुक थे. बहरहाल आगामी चुनाव में गठबंधन की सम्भावना और कांग्रेस के एजेंडे को लेकर कानपुर के चुनिन्दा कांग्रेसजनों से जो हमारा लगभग घंटे भर का संवाद हुआ, उससे मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचे बिना नहीं रह सका कि 90 प्रतिशत से अधिक लोगों को कांग्रेस के ब्रह्मास्त्र : 5 न्याय पर केन्द्रित कांग्रेस के न्याय-पत्र नामक घोषणापत्र के विषय कोई जानकारी नहीं, जिसके जोर से पार्टी मोदी सरकार को सत्ता से आउट करते-करते रह गई. जिनकों धुधली सी जानकारी थी भी उन्हें इस बात का इल्म नहीं था कि अगर 2024 में मोदी चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के जरिये वोट चोरी कर , वित्त मंत्री सीतारमण के पति प्रभाकर परकला और दूसरे राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक 79 सीटों पर हेरा – फेरी नहीं किये होते तो आज केंद्र की सत्ता पर इंडिया गठबंधन काबिज होता और नरेंद्र मोदी झोला उठाकर गुजरात चले गए होते. 5 न्याय से जुड़ा कांग्रेस के ब्रह्मास्त्र के प्रभावकारिता को देखते हुए ही पीएम मोदी वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लेकर उस एसआईआर(SIR) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में अग्रसर हुए, जिस एसआईआर को प्रभाकर परकला जैसों ने ‘ रक्तरहित राजनीतिक नरसंहार’ कहा एवं जो आज की तारीख में सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है!

समग्र वर्ग की चेतना से दरिद्र भारतीय छात्र नहीं दोहरा सकते : श्रेणी समाज के छात्रों का इतिहास

बहरहाल आज अगर अधिकांश कांग्रेस कार्यकर्ता अपनी पार्टी के मारणास्त्र को लगभग भूल चुके हैं तो इसलिए कि पिछले 4, 5 महीनों से कांग्रेस का पूरा जोर परीक्षाओं में हुई धांधली तथा वोट चोरी की ओर राष्ट्र का ध्यान आकर्षित करने की ओर रहा. यह सही है कि पेपर लीक और एसआईआर के जरिए वोट चोरी कर लोकतंत्र को अपहृत करने का जो कुत्सित प्रयास मोदी सरकार कर रही है, उसके लिए राहुल गांधी को छात्रों की गूंज और वोट चोरी पर बड़े-बड़े प्रेस कांफ्रेंस व मीटिंगे आयोजित करना जरुरी था. लेकिन इस क्रम में पार्टी के मारणास्त्र की अनदेखी से बचना भी जरुरी था, जो नहीं हो पाया, क्योंकि इसी के जोर से ही आने वाले दिनों में पार्टी सत्ता में सकती है! परीक्षा और चुनाव में होने वाली धाधली पर एक जिम्मेवार पार्टी होने के नाते कांग्रेस का इन मुद्दों पर सक्रिय होना एक अत्याज्य कर्तव्य था. किन्तु ये मुद्दे चुनाव जितवाने में पार्टी के ब्रह्मास्त्र जैसे प्रभावी नहीं हैं. विशेषकर, जिस पेपरलीक मुद्दे ने जेन जी को उद्वेलित किया है, उनसे कांग्रेस के पक्ष में निर्णायक मतदान की उम्मीद ही नहीं की जा सकती. कारण, भारत दुनिया के दूसरे समाजों की भांति श्रेणी नहीं, जाति समाज है, जहां के बड़े-बड़े साधु- संत , राजा-महाराजा से लेकर लेखक- पत्रकार- कलाकार तक समग्र वर्ग की चेतना से दरिद्र रहे. जेन जी भी इसका अपवाद नहीं है: वोट करते समय वह,भी अपना स्व-वर्णीय हित देखेगी. वह श्रेणी समाज के युवाओं की भांति एक कॉमन लक्ष्य को लेकर सामने नहीं आ सकती. इसी तरीके से एसआईआर भी बेहद जरुरी होने के बावजूद चुनाव जीतने के लिए खूब मुफीद मुद्दा नहीं था. कारण, इस देश में हिन्दू धर्मशास्त्रों में गहरी आस्था रखने वाले भारत के प्रभु वर्ग के 90 % से अधिक लोग संघ-भाजपा की भांति मन-प्राण से यह विश्वास करते हैं कि दलित,आदिवासी, पिछड़े और आधी आबादी से युक्त 90 % से अधिक वंचित हिन्दू आबादी का आर्थिक , शैक्षिक और धार्मिक के साथ वोट के जरिये राजनातिक अधिकार का भोग अधर्म है. और आज मौका माहौल देख कर संघ- भाजपा ने प्रशांत भूषण के ‘रिजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) वाले बयान को आधार बनाकर विपक्ष के खिलाफ हल्ला बोल दिया है कि वह चुनाव हारने के बाद संवैधानिक व्यवस्था के बजाय सड़क के जरिये अराजकता फैलाकर विदेशी मॉडलों (बांग्लादेश, नेपाल व अन्य देशों में हुए तख्ता पलट ) के तर्ज पर सत्ता हथियाने की साजिश कर रहा है. इस नैरेटिव को हवा देने में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, संघ प्रमुख मोहन भगवत के साथ पूरी गोदी मीडिया मैदान में उतर चुकी है और विपक्ष रक्षात्मक मुद्रा अख्तियार करते नजर आ रहा है.

रिजिम चेंज पर संघ-भाजपा हुए नए सिरे से आक्रामक

आज रिजीम चेंज के मुद्दे पर कांग्रेस नेता पवन खेडा प्रशांत भूषण का बचाव करते हुए राजनाथ सिंह पर पलटवार करते हुए कह रहे हैं कि विपक्ष और हर राजनीतिक दल का मकसद चुनाव के जरिए सरकार (रिजिम) बदलना ही होता है , और 1977 में भी चुनाव के जरिए सत्ता परिवर्तन हुआ था. 2012-13 में जब प्रशांत भूषण किसी अन्य रिजिम के खिलाफ आन्दोलन कर रहे थे, तब भाजपा उनका समर्थन कर रही थी. अब जबकि लोकतंत्र की तपिश खुद भाजपा को झेलनी पड़ रही है, तो उन्हें परेशानी हो रही है. वैसे पवन खेडा का बयान बहुत ही युक्तिसंगत है, पर क्या प्रोपगंडा फ़ैलाने में भारत चैम्पियन संघ और मोदी के समक्ष यह युक्ति टिक पाएगी? स्मरण रहे संघ की शक्ति के स्रोतों का कोई ओ र छोर नहीं है इसलिए उसका राजनीतिक विंग भाजपा महज एक राजनीतिक दल नहीं है. वह हिन्दू राष्ट्र के जरिए जो सामाजिक –आर्थिक सोच जमीन पर उतारने की परिकल्पना कर रही है , उसके साथ करोडो साधु- संतों के साथ जन्मजात प्रभु वर्ग के 90% से अधिक लेखk -पत्रकार, छात्र – कलाकार – सेलेब्रेटिज के साथ तमाम धन्ना सेठ हैं. इस लिहाज से भाजपा सदस्यों के संख्या – बल के हिसाब से ही नहीं प्रभु वर्ग के तमाम तबको के समर्थान से पुष्ट एक ऐसी राजनीतिक पार्टी है, जिसका विश्व में कोई मुकाबला ही नहीं है .खासकर झूठा नैरेटिव खड़ा करने में तो विश्व में इसका कोई जोड़ ही नहीं! ऐसे में मुमकिन है वह अपनी प्रोपगंडा टीम के जरिए वोट चोरी के खिलाफ सडकों पर उतरे विपक्ष को डिफेंसिव बना दे! लेकिन अपनी प्रोपगंडा टीम के जरिए हो सकता है संघ-भाजपा रात को दिन और दिन को रात साबित कर दे, लेकिन सर्वशक्ति लगाकर भी वह कांग्रेस के मारणास्त्र: 5 न्याय और 25 गारंटी से युक्त न्याय- पत्र के रूप में आए उसके घोषणापत्र को म्लान नहीं कर सकते. ऐसे में जबकि ‘रिजिम चेज’ के बहाने संघ- भाजपा नए सिरे से हमलावर होने जा रहे हैं , कांग्रेस को अपने ब्रह्मास्त्र के साथ अवाम के बीच जाने का मन बनाना चाहिए.

कांग्रेस के मारणास्त्र का इम्पैक्ट

पौराणिक कथाओं के अनुसार जिस तरह देवासुर द्वारा किये गए समुद्र मंथन से 14 में से कालकूट, कामधेनु गाय , उच्चे : श्रवा घोडा ,एरावत हाथी और कौस्तुभ मणि जैसे पांच खास रत्न निकले थे , उसी तरह ऐतिहासिक भारत जोड़ो यात्रा के बाद जब राहुल गांधी ने जब 14 जनवरी , 2024 से भारत जोड़ो न्याय यात्रा की शुरुआत की जो 6,713 किलोमीटर लम्बी रही तो उससे राहुल गांधी ने आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक न्याय तथा लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के प्रति लोगों को जागरूक किया ही, उस यात्रा के शेष होते-होते उनकी ओर से पांच  न्याय और 25 गारंटियों का विचार सामने आया, जिसका  परिष्कृत रूप 5 अप्रैल, 2024 को  5 न्याय , 25 गारंटी और 300 वादों से युक्त  ‘न्याय पत्र’ के नाम से जारी  कांग्रेस के 48  पृष्ठीय घोषणापत्र में सामने आया! जिसे देखकर आम से लेकर खास तक हक्के बक्के रह गए. इस पर खबरहाट के प्रदीप चौहान ने अपने वीडियो का कैप्शन बनाया था,’ लोगों की तकदीर बदलने वाला घोषणापत्र!’ ‘ऐसा घोषणापात्र आजतक नहीं आया’, दावा किया था चर्चित पत्रकार श्रवण गर्ग ने. फ़ोर पीएम के संजय शर्मा ने कहा था,’ मोदी की बोगस गारंटियों पर राहुल गांधी का न्याय पत्र का दहला !’ अभय कुमार दूबे ने मुक्त कंठ से इसे ‘एक क्रातिकारी दस्तावेज’ करार दिया था. एक बड़े चैनल ने कहा था,’ आरक्षण की सीमा ख़त्म : कांग्रेस के घोषणापत्र ने मचा दिया तहलका!’ ऐसे ही अनगिनत दावों के बीच शरत प्रधान ने दावा किया था ,’ कांग्रेस की गारंटियां करेंगी धमाल’ और कर भी दिया. अभूतपूर्व गारंटियों से लैस कांग्रेस के घोषणापत्र ने मोदी के 400 पार जाने के मंसूबों पर पानी फेर दिया था. उस घोषणापत्र ने इस बात पर मोहर लगा दी थी कि सत्ता में बने रहने के लिए वोट चोरी की बड़ी परिकल्पना के सिवाय मोदी के समक्ष कोई अन्य विकल्प नहीं है और आज मोदी वोटी चोरी के तंत्र को बचाए रखने की सारी हदें पार करते दिख रहे हैं,जिसे लेकर पूरे विपक्ष के साथ देश सडकों पर है. भारी अफ़सोस की बात है कि कांग्रेस पिछले कुछ महीनों से अपने उस ‘मारणास्त्र’ अनदेखी किए जा रही थी, जिसने मोदी को चरम लोकतंत्र विरोधी कदम उठाने के लिए विवश कर दिया . वक्त का तकाजा है कि कांग्रेस सर्वशक्ति के साथ इस अमोघ अस्त्र को लेकर अवाम के बीच जाए, तभी वह लोकतंत्र और आइडिया ऑफ़ इंडिया की रक्षा कर पाएगी!

(लेखक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के विचार विभाग के चेयरमैन हैं )

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