Bharat Gyan Vigyan Samiti : भारत ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा पेटरवार में तीन दिवसीय पाठशाला : भारत के भविष्य पर राष्ट्रव्यापी अभियान

Bharat Gyan Vigyan Samiti : भारत ज्ञान विज्ञान समिति, झारखंड द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय पाठशाला/कार्यशाला पेटरवार के विवाह मंडप में किया गया। अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों से आए ज्ञान विज्ञान आंदोलन के कार्यकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

विशद कुमार

न्यूज इंप्रेशन 

Bokaro: भारत के भविष्य को बेहतर, समतामूलक और जन-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत भारत ज्ञान विज्ञान समिति, झारखंड द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय पाठशाला/कार्यशाला पेटरवार के विवाह मंडप में किया गया। अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों से आए ज्ञान विज्ञान आंदोलन के कार्यकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसमें भाग लिया। कार्यक्रम में भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. काशी नाथ चटर्जी ने ‘भविष्य का भारत’ अभियान के उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि हमें ऐसे भारत का निर्माण करना है, जिसमें हर व्यक्ति को सम्मानजनक रोजगार मिले, सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, कोई भूखा न रहे और प्रत्येक व्यक्ति की आय तथा जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि हो। उन्होंने कहा कि आज देश की अर्थव्यवस्था और सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि तो दिखाई देती है, लेकिन इस आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है। समाज के एक छोटे से हिस्से के पास संपत्ति और संसाधनों का बड़ा हिस्सा केंद्रित है, जबकि बड़ी आबादी आज भी रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्ष कर रही है। डॉ. काशी ने कहा कि इस असमानता को दूर करने के लिए केवल नीतियों पर चर्चा पर्याप्त नहीं है। जनता के बीच जाकर संवाद करना, उनकी आकांक्षाओं और समस्याओं को समझना तथा भविष्य के भारत की सामूहिक कल्पना को मजबूत करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से देशभर में लाखों संवाद आयोजित किए जाएंगे और आम लोगों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा।

अभियान को देश की आजादी की दूसरी लड़ाई के रूप में किया जाता याद

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. सत्यजीत चक्रवर्ती, संयुक्त सचिव, अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क एवं पूर्वोत्तर भारत के संयोजक ने कहा कि झारखंड की इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में शामिल होकर उन्हें विशेष खुशी हो रही है। उन्होंने वर्ष 1987 में बोकारो में आयोजित भारत ज्ञान विज्ञान जत्था को याद करते हुए कहा कि वह कार्यक्रम देश के विज्ञान आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। उस अभियान ने विज्ञान को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर ‘लैबोरेटरी से लैंड तक’ पहुंचाने का काम किया। उन्होंने कहा कि इसके बाद अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क और भारत ज्ञान विज्ञान समिति ने देश में विज्ञान चेतना, साक्षरता और जनशिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया। भारत ज्ञान विज्ञान समिति के नेतृत्व में चले साक्षरता अभियान में करोड़ों लोग साक्षरता केंद्रों से जुड़े और लाखों स्वयंसेवकों ने उन्हें पढ़ाया। इस अभियान को देश की ‘आजादी की दूसरी लड़ाई’ के रूप में भी याद किया जाता है। प्रो. चक्रवर्ती ने कहा कि ‘भविष्य का भारत’ राष्ट्रव्यापी अभियान वर्ष 2027 तक लगातार चलाया जाएगा। इसके माध्यम से देशभर में संवाद आयोजित किए जाएंगे कि आखिर ऐसा भारत कैसा हो, जिसमें सभी को रोजगार मिले, स्त्री-पुरुष समानता स्थापित हो, प्रत्येक व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, कोई निरक्षर न रहे और हर व्यक्ति को पर्याप्त भोजन तथा सम्मानजनक जीवन प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल कार्यक्रम करना नहीं, बल्कि लोगों के बीच संवाद कायम करना, उनकी आवाज को सामने लाना और उन संवादों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करना भी है। उन्होंने झारखंड में ज्ञान विज्ञान समिति के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि समिति ने बेरोजगारी को लेकर महत्वपूर्ण सर्वेक्षण किया है और वर्तमान में सरकारी विद्यालयों की स्थिति पर भी सर्वेक्षण का काम कर रही है। ये प्रयास पूरे झारखंड में जनशिक्षा और जनभागीदारी के आंदोलन को एक नई दिशा दे सकते हैं।

पंचायत को चाइल्ड फ्रेंडली पंचायत बनाने की दिशा में प्रयास 

महिला सशक्तिकरण और बाल हित पर जोर उद्घाटन सत्र में पंचायत की मुखिया निहारिका ने कहा कि उनकी पंचायत को चाइल्ड फ्रेंडली पंचायत बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने महिला सशक्तिकरण को पंचायत के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना समावेशी समाज का निर्माण संभव नहीं है। तीन दिवसीय यह राज्य स्तरीय पाठशाला आने वाले दिनों में ‘भविष्य का भारत कैसा हो?’ इस मूल सवाल पर गहन विचार-विमर्श, संवाद और कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने पर बल दिया। कार्यशाला के दूसरे दिन नागरिक शिक्षा के विषय पर विस्तार से चर्चा हुई और बताया गया कि प्रत्येक पंचायत में नागरिक शिक्षा केंद्र स्थापित करना अभियान का प्रमुख लक्ष्य है। आने वाले समय में ये केंद्र सामाजिक परिवर्तन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होंगे। डॉ. चटर्जी ने कहा कि इस दिशा में ज्ञान विज्ञान समिति, झारखंड ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। जनवरी 2026 में अलीगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला में झारखंड ने अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए 2026 के अंत तक 500 पंचायतों में नागरिक शिक्षा केंद्र स्थापित करने तथा अगले दो वर्षों में 1,000 पंचायतों तक इसका विस्तार करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। उन्होंने बताया कि वर्तमान में लगभग 300 पंचायतों में नागरिक शिक्षा केंद्र शुरू करने के लिए बैठक और प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रत्येक पंचायत में एक नागरिक शिक्षा केंद्र होगा, जिसके संचालन के लिए दो समन्वयकों का चयन किया जाएगा। इन समन्वयकों को ऑनलाइन पुस्तकालय, चर्चा मंडल, जनवाचन, महिला सशक्तिकरण, कृषि, जलवायु परिवर्तन तथा अन्य सामाजिक एवं जनसरोकार के विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद वे कम से कम छह महीने तक नियमित रूप से केंद्र का संचालन करेंगे। नागरिक शिक्षा केंद्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण, संविधान, अधिकार एवं कर्तव्य तथा अन्य जनसरोकार के मुद्दों पर नियमित चर्चा और गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य केवल लोगों को जानकारी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसे सजग और शिक्षित नागरिक तैयार करना है, जो अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों को समझें तथा समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए स्वयं पहल कर सकें। नागरिक शिक्षा केंद्र किसी सरकारी संस्था की तरह संचालित नहीं होंगे। इनका संचालन स्थानीय लोगों की स्वैच्छिक भागीदारी और सामूहिक पहल से किया जाएगा। गांव के लोग स्वयं सीखेंगे, आपस में संवाद करेंगे और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक रूप से पहल करेंगे।

संगठन को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई

दूसरे सत्र में ज्ञान विज्ञान समिति के संगठन को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई। पंचायत स्तर तक संगठन के विस्तार, कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने तथा जनसरोकार के मुद्दों पर निरंतर और प्रभावी ढंग से काम करने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिक शिक्षा केंद्रों को केवल बैठक या चर्चा का मंच न बनाकर गांव की वास्तविक समस्याओं से जोड़ना होगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे विषयों पर निरंतर पहल के माध्यम से इन्हें स्थानीय स्तर पर सामाजिक जागरूकता और परिवर्तन का प्रभावी केंद्र बनाया जा सकता है। कार्यशाला के समापन सत्र में 15 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में किए गए स्कूल एवं समुदाय स्वास्थ्य कार्यक्रम के सर्वे का प्रस्तुतिकरण किया गया। भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रवि जी ने सर्वे के निष्कर्षों तथा विद्यालय स्तर पर किए जा सकने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी। प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि विद्यालय को केवल शिक्षा का केंद्र न मानकर स्वास्थ्य, स्वच्छता, जागरूकता और सामुदायिक संवाद का केंद्र भी बनाया जा सकता है। 15 विद्यालयों में किए गए सर्वे के आधार पर तैयार कार्यक्रम में ऐसी गतिविधियों को शामिल किया गया है, जिनमें बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा सकती है। कार्यक्रम के तहत विद्यालय परिसर एवं शौचालय की नियमित साफ-सफाई, भोजन से पहले और बाद में हाथ धोने की आदत, बच्चों के नाखून, कान और बालों की जांच तथा चाइल्ड कैबिनेट की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया गया। इसके अलावा खेल, गेम्स एवं एक्सरसाइज तथा स्कूल किचन गार्डन की देखभाल को भी स्वास्थ्य कार्यक्रम से जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया। अभिभावक बैठकों में बच्चों द्वारा जंक फूड के दुष्प्रभाव पर प्रस्तुति, विशेष स्वास्थ्य अभियान, प्राथमिक स्वास्थ्य जांच, पोस्टर निर्माण, पढ़ने का उत्सव और स्वास्थ्य मेला जैसी गतिविधियों को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया है। स्वास्थ्य जागरूकता पर आधारित नाटक तथा पुस्तकों के माध्यम से बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समझ विकसित करने की संभावनाओं को भी सामने रखा गया।

झारखंड के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए समस्याओं का गहन अध्ययन होगा करना

अवसर पर डॉ. काशीनाथ चटर्जी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों को केवल स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें अपनी और अपने समुदाय की स्वास्थ्य समस्याओं को समझने तथा उनके समाधान के लिए सक्रिय बनाने की दिशा में काम करना है। विद्यालय में होने वाली गतिविधियों के माध्यम से शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक आपस में संवाद करेंगे, सवाल उठाएंगे और स्थानीय स्तर पर समाधान तलाशने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि तीन दिनों की कार्यशाला में जिन विषयों पर गंभीर चर्चा हुई है, उन्हें अब जमीन पर ले जाने की जरूरत है। यदि हमें नए भारत का निर्माण करना है और अपने जिले तथा झारखंड के भविष्य को बेहतर बनाना है, तो हमें समाज की समस्याओं का गहन अध्ययन करना होगा। बेरोजगारी सर्वे से लेकर स्कूल सर्वे और बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन इसी दिशा में किए जा रहे प्रयास हैं। इन सर्वेक्षणों के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में एक हजार पंचायतों में नागरिक शिक्षा केंद्र स्थापित करने की दिशा में भी काम को आगे बढ़ाया जाएगा। समापन सत्र में बोकारो के बुद्धिजीवी नागेंद्र जी ने पर्यावरण के क्षेत्र में किए जा रहे अपने कार्यों की जानकारी दी। पेटरवार के बुद्धिजीवी सुधीर सिन्हा जी ने स्थानीय परिस्थितियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़े अपने विचार रखे। तीनों दिनों तक कार्यशाला में सक्रिय रूप से साथ रहीं मुखिया निहारिका जी ने भी अपने अनुभव साझा किए। कार्यशाला के दौरान विभिन्न पंचायतों में सर्वेक्षण करने वाले स्वयंसेवकों के योगदान की सराहना की गई। समापन अवसर पर 15 पंचायतों में सर्वे करने वाले स्वयंसेवकों को सम्मानित किया गया। तीन दिवसीय कार्यशाला के समापन पर यह संदेश उभरकर सामने आया कि सर्वेक्षण केवल आंकड़े जुटाने का माध्यम नहीं, बल्कि स्थानीय समस्याओं को समझने, संवाद शुरू करने और समाधान की दिशा में सामूहिक पहल करने का आधार है।

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