Bharat Tiwari Encounter News: एनकाउंटर हो, पर जाति देखकर
Bharat Tiwari Encounter News: योगी ने ही न्यायपालिका को ठेंगा दिखाते हुए एनकाउंटर और बुलडोजर का बढ़ावा दिया था, जो आज तक जारी है।
अलखदेव प्रसाद ‘अचल’
न्यूज़ इंप्रेशन
Bihar: ऐसे फर्जी पुलिस एनकाउंटर को किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं ठहराया जा सकता। जब सरकार तानाशाह और निरंकुश बन जाती है, तो न्यायपालिका को भी अपनी मुट्ठी में समझने लगती है। न्यायपालिका को भी ठेंगा दिखाने लगती है और मनमानी करने लगती है। भले वह कानून जायज़ नहीं हो। वैसे मुख्य रूप से एनकाउंटर की शुरुआत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ही की थी। योगी ने ही न्यायपालिका को ठेंगा दिखाते हुए एनकाउंटर और बुलडोजर का बढ़ावा दिया था, जो आज तक जारी है। जिसका अनुकरण अन्य राज्यों के भाजपा मुख्यमंत्रियों ने तो किया ही,बिहार के वर्तमान भाजपाई मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी धड़ल्ले से इसकी शुरुआत की। ऐसा जिस भी मुख्यमंत्री ने किया, सिर्फ अपनी अलग पहचान बनाने, लोकप्रिय बनने और जनता को भयभीत करने के लिए किया।शायद सम्राट चौधरी को भी ऐसा ही लगा होगा। जबकि सम्राट चौधरी ने यह समझने में भूल कर दी कि योगी को उसके सारे पुलिस पदाधिकारी सपोर्ट में रहेंगे,पर जब भी ऐसा बखेड़ा खड़ा होगा, तो आपके पुलिस पदाधिकारी आप से अपना पल्ला झाड़ लेंगे। बिहार की राजनीति में सच्चाई यही है कि बिहार भाजपा में ही बहुत ऐसे खास करके सवर्ण नेता हैं, जो नहीं चाहते थे कि बिहार का मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बनें। वैसे लोगों को भरत तिवारी के एनकाउंटर पर सम्राट चौधरी पर सवाल उठाने का फिलहाल अच्छा मौका मिल गया है। इसीलिए वैसे नेता सिर्फ सवाल ही नहीं उठा रहे हैं,बबाल भी मचाए हुए हैं।भरत तिवारी तो सिर्फ बहाना है,असल मकसद इसी बहाने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री के पद से हटाना है। इसके लिए सारे सवर्ण नेता, सवर्ण यूट्यूबर ,बड़े-बड़े पूर्व पुलिस पदाधिकारी और अन्य बुद्धिजीवी भरत तिवारी के पक्ष में खड़े होकर भरत तिवारी के एनकाउंटर को ग़लत साबित करने में लगे हुए हैं।
वर्तमान मुख्यमंत्री को भी गालियां चैलेंज करता था
सम्राट चौधरी पर विरोधी दल के नेता तो इसलिए उनके क्रियाकलापों को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं कि उन लोग विरोधी दल के हैं। इसलिए उनका काम ही सवाल उठाना है और एनकाउंटर करने वाले पुलिस वालों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग करना है। वैसे औपचारिकता पूरी करने के लिए उन पुलिस वालों को सस्पेंड भी कर दिया गया है। परंतु भरत तिवारी के समर्थक पुलिस वालों को सबक सिखाने पक्ष में हैं। पुलिस वालों पर हत्या का मुकदमा चलाने के पक्ष में हैं।जिससे यह खुलकर सामने आ गया है कि भरत तिवारी चूंकि ब्राह्मण था, तो ब्राह्मण के पक्ष में सभी लोग खड़े हो गए हैं। भरत तिवारी मोदी और योगी का पक्का समर्थक के साथ-साथ वह सनकी भी था। कहा जाता है कि एक बार वह अपने घर से पैदल ही धीरेंद्र शास्त्री के यहां भी पहुंच गया था। वह अपने को पक्का सनातनी कहता था और पहले भी पुलिस वालों के साथ हाथापाई कर चुका था। जबकि वह आम आदमी की समस्या को लेकर भी आवाज उठाता था। आम आदमी की समस्याओं के लिए संघर्ष भी करता था,भले उसके पीछे उसका अपना स्वार्थ क्यों न हो। भरत तिवारी योगी के एनकाउंटर और बुलडोजर को खुलेआम जायज ठहराता था। आज तक उसने किसी भाजपा के किसी बड़े सवर्ण नेताओं गाली देते नहीं देखा गया था, परंतु जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे, तो उनको भी को भी भद्दी भद्दी गालियां देता था और शोसल मीडिया पर वायरल करता था। वर्तमान मुख्यमंत्री को भी गालियां देते हुए चैलेंज करता था।
भरत तिवारी के फर्जी एनकाउंटर पर बहा रहे हैं घड़ियाली आंसू
एनकाउंटर के पहले भरत तिवारी पुलिस प्रशासन पर पिस्तौल ताने और खुलयाम गाली गलौज किया था और उसका वीडियो भी वायरल किया था। शाम से लेकर करीब बारह घंटे के दौरान उसने दस पन्द्रह बार गोलियां भी चलायी थी। उस दौरान वह न अपनी मां की बात मानने के लिए तैयार था, न पिता की। पुलिस वाले जितने अधिक समझाते जा रहे थे,वह उतना अधिक गाली गलौज करते जा रहा था। आखिर यह सब कुछ क्या दर्शाता है? क्या यह किसी भी रूप में क्षम्य था? वह कैसा समाजसेवी था, जो अवैध पिस्तौल से पुलिस के सामने अपनी छत पर से पिस्तौल से पुलिस वालों की तरफ फायरिंग कर रहा था? भद्दी-भद्दी गालियां दे रहा था? वह जिस तरह का पुलिस वालों के साथ दुर्व्यवहार कर रहा था, उसके अनुसार चाहे सरकार किसी की भी होती ,लेकिन भरत तिवारी को वही सजा देता, जो सजा उसको मिली। भले ही उसे जायज नहीं कहा जा सकता। जबकि उस दौरान गांव वालों ने भी ऐसा करने से भरत तिवारी को नहीं रोका। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो नेता या अफसर या अपने को बुद्धिजीवी कहने वाले लोग भरत तिवारी के एनकाउंटर को गलत बताते हुए अपने दर्शन बघार रहे हैं, उनमें अधिकांश भरत तिवारी की ही जाति के हैं।जब उसके पहले इसी बिहार में भागलपुर में अपराधी रामधनी यादव को उस समय फर्जी एनकाउंटर कर दिया गया था, जब वह स्वेच्छा से थाने में अपने आपको समर्पण कर दिया था। सम्राट चौधरी के राज में ही सिवान के सोनू यादव को फर्जी एनकाउंटर कर मौत की नींद सुला दिया गया था। पटना के मसौढ़ी में मोहम्मद हैदर को फर्जी एनकाउंटर में पुलिस वालों ने मार गिराया था। इसके अलावा दर्जनों मामलों में पुलिस वालों ने अपराधियों को एनकाउंटर कर लंगड़ा कर दिया था। आज जो लोग भरत तिवारी के फर्जी एनकाउंटर पर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं, एनकाउंटर को गलत ठहरा रहे हैं,ये लोग उस दिन सिर्फ खामोश ही नहीं थे, बल्कि ताल ठोक कर कह रहे थे कि बिहार में सम्राट चौधरी का राज है। बिहार में भी योगी मॉडल चलेगा। इसलिए कि जिन लोगों का एनकाउंटर हुआ था, उनमें कोई सवर्ण नहीं थे।पर जैसे ही अपनी जाति का एनकाउंटर हुआ, वैसे ही जातिवादी मानसिकता उफ़ान मारने लगी और बिलबिलाने लगे कि घोर अनर्थ हुआ। फिर फर्जी एनकाउंटर को गलत ठहराने लगे। जो इन लोगों के दोगलेपन को ही दर्शाता है। हद तो तब हो गई, जब भरत तिवारी के बड़े-बड़े जाति के नेताओं और पूर्व अफसरों ने भरत तिवारी को बहुत बड़ा समाजसेवी और देशभक्त साबित करने लगे और भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद से तुलना करने लगे। जब दलितों पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के लोग मारे जाएं, तो वह खूंखार अपराधी कहते हैं और जब भरत तिवारी जैसा सिरफिरा मारा गया, तो क्रांतिकारी साबित करने लगे। जो उन लोगों की घटिया मानसिकता को दर्शा दिया। मतलब एनकाउंटर होना चाहिए, लेकिन हम लोगों की जाति के व्यक्ति का एनकाउंटर नहीं होना चाहिए। जैसे योगी के राज में सभी जातियों का एनकाउंटर हुआ, पर ठाकुर जातियों का एनकाउंटर नहीं हुआ। ऐसे लोग कानून को भी दो हिस्से में बांट देना चाहते हैं।
हर फर्जी एनकाउंटर की जांच होनी चाहिए
सम्राट चौधरी के ही राज में जितने भी दलितों , पिछड़ों अल्पसंख्यकों के फर्जी एनकाउंटर हुए, जिसमें पुलिस वालों को सस्पेंड नहीं किया गया था, परंतु भरत तिवारी के फर्जी एनकाउंटर में जो पुलिस वाले थे, उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। उस फर्जी एनकाउंटर पर न्यायिक जांच कराने की तैयारी चल रही है। यह सब कुछ इसलिए हो रहा है कि भरत तिवारी सवर्ण जाति का था। आज भी पिछड़ों और दलित जातियों में जो नासमझ हैं, जो मानसिक रूप से उन्हीं लोगों के गुलाम हैं। वैसे लोग भी भरत तिवारी के पक्ष में वही राग अलाप रहे हैं, जैसे सवर्ण जाति के लोग राग अलाप रहे हैं। कुछ जो पिछड़े और दलित जाति के नेता हैं, जिन्हें आने वाले चुनाव में उनके वोटों की जरूरत है, वैसे लोग भी सच के साथ नहीं होकर,उन लोगों के पक्ष में खड़े हैं। अगर जांच होनी चाहिए, तो सिर्फ भरत तिवारी के एनकाउंटर की ही जांच क्यों, हर फर्जी एनकाउंटर की जांच होनी चाहिए। फिर सिर्फ भरत तिवारी के ही एनकाउंटर की जांच क्यों? क्योंकि जहां भी पुलिस वाले अपराधियों का फर्जी एनकाउंटर करते हैं, उसमें तकिया कलाम की तरह यह बयान तो देते हैं कि अपराधी गोली चला रहा था। इसलिए हम लोगों ने आत्मरक्षार्थ उस पर गोली चलाई। जिसमें वह मारा गया। परंतु सच यही रहता है कि पकड़े जाने के बाद नजदीक से फर्जी एनकाउंटर किया जाता है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
