Congress News: कांग्रेस में सांगठनिक बदलाव की जड़ें निहित हैं रायपुर अधिवेशन में                                  

Congress News: 26 जून को हुए इस सांगठनिक बदलाव के तहत कई राज्यों के प्रभारियों को बदलने के साथ-साथ पार्टी के फ्रंटल संगठनों और प्रदेश इकाइयों में भी नई नियुक्तियां की गई हैं. वरिष्ठ दलित नेता और पूर्व दिल्ली मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को अविनाश पांडे की जगह उत्तर प्रदेश का नया एआईसीसी प्रभारी नियुक्त किया गया है.

                                                            एच. एल. दुसाध   

न्यूज इंप्रेशन 

Lucknow: कांग्रेस पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपने संगठन में एक व्यापक फेरबदल की शुरुआत की है. 26 जून को हुए इस सांगठनिक बदलाव के तहत कई राज्यों के प्रभारियों को बदलने के साथ-साथ पार्टी के फ्रंटल संगठनों और प्रदेश इकाइयों में भी नई नियुक्तियां की गई हैं. वरिष्ठ दलित नेता और पूर्व दिल्ली मंत्री राजेंद्र पाल गौतम  को अविनाश पांडे की जगह उत्तर प्रदेश का नया एआईसीसी प्रभारी नियुक्त किया गया है. वहीं, हरियाणा का प्रभार बीके हरिप्रसाद जगह  संजय दत्त को सौंपा गया है, जबकि लालजी देसाई को अजय कुमार लल्लू की जगह ओडिशा का प्रभारी नियुक्त किया गया है. लोकसभा सांसद बी. मणिकम टैगोर  को तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TNCC) का नया अध्यक्ष बनाया गया है। पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष श्रीनिवास बी.वी. को कांग्रेस सेवा दल का नया मुख्य संगठक (Chief Organiser) नियुक्त किया गया है. कांग्रेस द्वारा किए जा रहे हालिया संगठनात्मक फेरबदल को राजनीतिक विश्लेषक आगामी चुनावों—विशेषकर 2029 के लोकसभा चुनाव—की तैयारी और जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय करने की एक रणनीतिक पहल के रूप में देख रहे हैं. उनका मानना है कि पार्टी आक्रामक युवा नेतृत्व को आगे बढ़ा रही है और खराब प्रदर्शन करने वाले पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई कर रही है. राज्यों में किए गए हालिया बदलावों (जैसे तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में नियुक्तियां) को विश्लेषक चुनाव-केंद्रित बता रहे हैं. उनका कहना है कि पार्टी राज्यों में गुटबाजी खत्म कर नए सामाजिक समीकरणों, खासकर दलित और ओबीसी मतदाताओं को साधने में जुटी है . वरिष्ठ पत्रकारों का मत है कि यह पुनर्गठन केवल चुनावी रणनीति तक सिमित नहीं है , बल्कि पार्टी के मूल ढांचे को मजबूत करने का दीर्घकालिक प्रयास है. विश्लेषकों के अनुसार पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती असंतुष्ट वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलना और कैडर में निरंत्तरता बनाये रखना है. 

बहरहाल संगठन में जो बदलाव हुआ है, उसमें सोशल मीडिया में जिस व्यक्ति को व्यापक समर्थन मिल रहा है, वह श्रीनिवास बी.वी.  हैं , जिन्हें कांग्रेस सेवा दल का नया मुख्य संगठक बनाया गया है. कांग्रेस समर्थकों को लगता है कर्णाटक के शिमोगा जिले से ताल्लुक रखने वाले श्रीनिवास मुख्यमत्री डीके शिवकुमार और उनके भाई सुरेश कुमार के करीबी 45 वर्षीय श्रीनिवास को कांग्रेस के सेवा दल का मुख्य संगठक नियुक्त किये जाने से जिस सेवा दल के प्रथम अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरु रहे एवं जिसने स्वाधीनता संग्राम में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा किया, अब वह कांग्रेस के उत्थान में और प्रभावी भूमिका निभा सकता है. एनएसयूआई के सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले श्रीनिवास बी.वी. बाद में भारतीय युवा कांग्रेस के ब्लाक अध्यक्ष बने और तेजी से सफलता की सीढियाँ चढ़ते हुए वह 2018 में राष्ट्रीय महासचिव तो 2019 भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद से नवाजे गए. कांग्रेस पार्टी के प्रति उनका समर्पण, जुनून और अथक मेहनत वास्तव में अद्वितीय है। कोरोना काल में ‘ऑक्सीजन मैन’ के रूप में पहचान बनाने वाले श्रीनिवास के नेतृत्व में सेवा दल अपने पुराने गौरव को पुनः प्राप्त करेगा, नए जोश और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेगा तथा हजारों-लाखों नए नेतृत्व को तैयार करेगा! 

लेकिन कांग्रेस के नए सांगठनिक बदलाव में जिस शख्स को लेकर सर्वाधिक चर्चा हो रही है, वह राजेन्द्र पाल गौतम हैं, जिनकी यूपी के नए कांग्रेस प्रभारी के रूप में नियुक्ति को अधिकांश राजनीतिक विश्लेषक सामाजिक न्याय की राजनीति की दिशा में कांग्रेस के एक ऐतिहासिक मास्टर स्ट्रोक के रूप में देख रहे हैं. वहीँ वंचित वर्गों के कांग्रेस पदाधिकारी और समर्थकों की नज़रों में राजेंद्र पाल गौतम को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपना केवल एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, संविधान के मूल्यों और बहुजन समाज के सम्मान को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी कदम है. बहरहाल राजेन्द्र पाल गौतम की नियुक्ति को कांग्रेस का एक मास्टर स्ट्रोक और दूरदर्शी कदम बताए जाने के बावजूद एक वर्ग ऐसा है जो मानता है कि आम आदमी पार्टी से आए जिस व्यक्ति को कांग्रेस ज्वाइन दो साल भी नहीं हुआ , उसे देश के राजनीति की दिशा तय करने वाले उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य का प्रभार सौपना पार्टी नेतृत्व का सही कदम नहीं है. ऐसा आरोप लगाने वाले इस बात की अनदेखी कर हैं कि राजेन्द्र पाल गौतम में ऐसी कुछ बातें हैं जिससे आकर्षित होकर पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राजनीतिक रूप से सर्वाधिक महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश प्रदेश की जिम्मेवारी सौंपा है .इसे ठीक से समझने के लिए उनके अतीत का सिंहावलोकन कर लेना पड़ेगा!

 कांशीराम के आंदोलनों से निकले राजेन्द्र पाल गौतम देश के उन चुनिन्दा दलित नेताओं में एक हैं ,जिन्हें दलितों के हर वर्ग का समान रूप से आदर मिलता है. उन्हें दलित लेखकों के मंच पर जितना पूछा जाता है, उतना ही सम्मान तमाम दलित एक्टिविस्टों के मचों पर मिलता है. जहाँ तक बुद्धमय भारत निर्माण में लगे संगठनों का सवाल है , वहां उनके जैसा सम्मान शायद ही किसी अन्य दलित नेता को मयस्सर होता है. इसका कारण है दलित समाज के प्रति उनकी विरल प्रतिबद्धता . इस प्रतिबाद्धता के कारण ही जब वह दलितों के लिए अछूत माने जानी वाली आम आदमी पार्टी में रहे , उनकी स्वीकार्यता पर कोई फर्क नहीं पड़ा. तब भी उन्हें दलित लेखकों और एक्टिविस्टों का भरपूर सम्मान मिलता रहा. वही राजेंद्र पाल गौतम जब हरियाणा विधानसभा चुनाव के पहले 6 सितम्बर, 2024 को कांग्रेस में शामिल हुए दलितों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई. लोग उम्मीद करने के लगे कि कांग्रेस उन्हें शीघ्र ही कोई बड़ी जिम्मेवारी देकर दलितों में उनकी अपार स्वीकार्यता का सद्व्यवहार करेगी . किन्तु थोड़े विलम्ब से ही सही, जब 4 जून, 2025 को उन्हें कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग की जिम्मेवारी मिली , दलित ख़ुशी से झूम उठे. तब दलित बुद्धिजीवियों की ओर से उनके पक्ष में सकारात्मक प्रतिक्रिया का एक सैलाब उमड़ा था ,जिसका सही प्रतिबिम्बन 6 जून को चर्चित बहुजन लेखक चन्द्र भूषण सिंह यादव की ‘ क्या कांग्रेस बदल रही है-क्या कांग्रेस मनुवाद का केचुल उतारने को तैयार है’ शीर्षक से छपे लेख की निम्न में हुआ था. 

‘कांग्रेस पार्टी ने अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष एकदम सोलह आने खांटी अंबेडकरवादी दिल्ली सरकार के पूर्व मिनिस्टर राजेन्द्र पाल गौतम जी को बनाया है. माननीय गौतम जी आम आदमी पार्टी के एमएलए और मिनिस्टर रहे हैं. दिल्ली सहित पूरे देश के दलितों में विशेष पहचान रखने वाले राजेन्द्र पाल गौतम जी ‘जय भीम मिशन’ के संस्थापक और दिल्ली में अनुसूचित समाज के लिए बेहतरीन काम करने वाले एक मुखर राजनेता हैं. आम आदमी पार्टी को सरकार में लाने में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है, जिसे मनुवाद से ओतप्रोत अरविन्द केजरीवाल को शायद समझ में नहीं आया . आम आदमी पार्टी में मिनिस्टर रहते हुए उन्होंने दिल्ली में बौद्ध सम्मलेन कर हजारों लोगों को बौद्ध अनुयाई बना आंबेडकर साहब की 22 प्रतिज्ञाएँ पढवा दिया था, जिसमे मैं भी शामिल रहा .इस कार्यक्रम से कुपित केजरीवाल ने उनसे मंत्री पद से त्याग पत्र ले लिया. गौतम जी ने वैचारिकी के लिए मंत्री पद कुर्बान कर दिया और फिर केजरीवाल भी मनुवाद में कुर्बान हो गए. ऐसे 24 कैरेट आंबेडकरवादी / बुद्धिवादी को कांग्रेस पार्टी ने अनुसूचित मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर खुद में एक बड़े बदलाव का संकेत दिया है. कांग्रेस पार्टी ने इधर हुए सांगठनिक बदलावों और नियुक्तियों में मंडलवादी/शरदवादी अनिल जयहिंद जी को ओबीसी मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष , घोर आरक्षण समर्थक मनोज यादव सोशलिस्ट को यूपी के ओबीसी मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष एवं खांटी आंबेडकरवादी/ बुद्धिवादी राजेन्द्र पाल गौतम को एससी मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस पार्टी ने अपने आपको 85 % ओबीसी और एससी कम्युनिटी में संदेश तो दिया है, लेकिन यह हाथी के दांत जैसा दिखावटी होगा या वास्तविक , यह भविष्य के गर्भ में है !’ 

बहरहाल तब ढेरों बहुजन बुद्धिजीवियों ने ही कांग्रेस की नीयत को लेकर चंद्रभूषण सिंह यादव की भांति ही आशंका जाहिर की थी . लेकिन पिछले डेढ़- दो सालों में जिस तरह राहुल गांधी ने दलित –पिछड़ों में टॉप 10 कंपनियों के मालिक के साथ प्राइवेट यूनिवर्सिटियों के वीसी , बड़े-बड़े अस्पतालों , अख़बारों , चैनलों का मालिक और मैनेजर बनते देखनी की इच्छा बार-बार जाहिर की है ; जिस उन्होंने जितनी आबादी- उतना हक़ के जरिये सामाजिक न्याय के एजेंडे को ब्यूरोक्रेसी, न्यायपालिका , शिक्षण संस्थानों, मीडिया, सप्लाई, ठेकेदारी इत्यादि के साथ सेना तक प्रसारित करने के साथ; जिस तरह दलितों की मुखर आवाज प्रो .रतनलाल को राष्ट्रीय प्रवक्ता, डाइवर्सिटी मैन एच.एल .दुसाध को यूपी के विचार विभाग का प्रदेश अध्यक्ष बनाने के मिनाक्षी नटराजन को राज्यसभा में भेजने का प्रयास किया है, उससे तह हो गया है कि कांग्रेस दलित , आदिवासी ,पिछडो, अल्पसंख्यकों इत्यादि को संगठन में अहम् पद देने और सामाजिक न्याय के एजेंडे को बुलंदी प्रदान करने के प्रति गंभीर है, जिस पर उसने राजेन्द्र पाल गौतम को यूपी का प्रभारी बनाकर अपने निश्चय की मोहर लगा दी है ! आज ढेरों राजनीतिक विश्लेषक भी 26 जून हुए सांगठनिक बदलाव को कांग्रेस के सांगठनिक ढांचे में सामाजिक न्याय की अभिव्यक्ति के रूप में देख रहे हैं ! दरअसल पिछले कुछ सालों से कांग्रेस के सांगठनिक ढांचे में जो उत्तरोतर सामाजिक न्यायमुखी बदलाव परिलक्षित हो रहा है, उसकी जड़ें फरवरी 2023 में रायपुर में आयोजित कांग्रेस के 85 वें में निहित हैं, जहां कांग्रेस ने अपना सवर्णवादी चेहरा बदलने का उपक्रम चलाया ! 

लोकसभा चुनाव 2024 की पृष्ठभूमि में 24 से 26 फरवरी , 2023 तक आयोजित रायपुर अधिवेशन में सामाजिक न्याय से जुड़े ऐसे- ऐसे प्रस्ताव पारित हुए, जिसकी प्रत्याशा कट्टर सामाजिक- न्यायवादी दलों तक से नहीं की जा सकती. वहां से पास हुए प्रस्तावों का ही विस्तार आज सामाजिक न्याय से जुड़े राहुल गांधी के संबोधनों में हो रहा है. उसमें दलित बहुजनों को शक्ति के स्रोतों में हिस्सेदारी दिलाने के जो ढेरों प्रस्ताव पास हुए,उनमें एक यह था कि पार्टी ब्लाक, जिला , राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर वर्किंग कमेटी में 50 प्रतिशत स्थान दलित, आदिवासी , पिछड़े, अल्पसंख्यक समुदाय और महिलाओं को देगी. उसके बाद रायपुर से निकले सामाजिक न्याय के प्रस्तावों को तो राहुल गांधी नई –नई उंचाई दिए जा रहे थे,लेकिन संगठन की शक्ल ज्यों की त्यों रही, जिससे दलित वंचितों में बेचैनी बढती जा रही थी . इस बात का इल्म राहुल गांधी को था. ऐसे में वह छोटे-मोटे नहीं, एक क्रातिकारी बदलाव की घोषणा के लिए आगे आए,जिसके लिए दिन चुना महात्मा गांधी का शहादत दिवस : 30 जनवरी, 2025 ! उस दिन उन्होंने दिल्ली में दलित इन्फ़्लुएन्सर्स को संबोधित करते हुए कहा था –‘ हमने दलितों, पिछड़ों, अतिपिछड़ो का विश्वास बरकरार रखा होता तो आरएसएस कभी सत्ता में नहीं आ पाता. इंदिरा जी के समय उनका पूरा भरोसा बरकरार था . दलित, आदिवासी, पिछड़े, अल्पसंख्यक सब जानते थे कि इंदिरा जी उनके लिए लड़ेंगी. लेकिन 1990 के बाद विश्वास में कमी आई, इस वास्तविकता को कांग्रेस को स्वीकार करना पड़ेगा . पिछले 10-15 सालों में कांग्रेस ने जिस प्रकार आपके हितों की रक्षा करनी थी, नहीं कर पाई! अंत में उन्होंने कहा था कि हम अपनी पार्टी में आन्तरिक क्रांति लायेंगे, जिससे संगठन में दलित, पिछड़ों और वंचितों को शामिल किया जा सके. राहुल गाँधी ने पार्टी में आन्तरिक क्रांति लाने की जो घोषणा 2025 की 30 जनवरी को की, उसके बाद संगठन में दलित,अदिवासी –पिछडो- अल्पसंख्यकों के पक्ष चौकाने वाले बदलाव होने लगे, जिसकी ताजी कड़ी है राजेन्द्र पाल गौतम की उत्तर प्रदेश के प्रभारी के रूप में ताजपोशी. चूँकि बदलाव का लक्ष्य इंदिरा जी के दौर की भांति दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतना है, इसलिए आने वाले दिनों में कांग्रेस संगठन में कुछ और चौकाने वाले बदलाव देखे जा सकते है ! 

(लेखक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के विचार विभाग के प्रदेश अध्यक्ष हैं)

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