Gold/Petrol News: मोदी की नसीहत के पीछे का सच

Gold/Petrol News: शायद ऐसा कर मोदी जी इस सच्चाई को छुपा रहे हैं कि देश को उन्होंने इतना कबाड़ा बना दिया है। यहां की आर्थिक अर्थव्यवस्था इतनी चरमरा गई है कि जनता के बीच त्राहिमाम मचा हुआ है।

अलखदेव प्रसाद ‘अचल’

Bihar: हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से सोना न खरीदने, पेट्रोल डीजल की बचत करने, विदेश न जाने,खाने में तेल का कम इस्तेमाल करने,कम गैस खपत करने और न जाने क्या-क्या जनता को नसीहत दी है, वह उनकी धूर्तता को ही दर्शाता है। जो दूसरे को नसीहत दे और खुद वही करे, इससे बड़ा धूर्त कोई हो ही नहीं सकता।

शायद ऐसा कर मोदी जी इस सच्चाई को छुपा रहे हैं कि देश को उन्होंने इतना कबाड़ा बना दिया है। यहां की आर्थिक अर्थव्यवस्था इतनी चरमरा गई है कि जनता के बीच त्राहिमाम मचा हुआ है। सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि ऐसा कहने में हमारे मोदी जी को शर्म भी नहीं आयी।

आखिर अब कांग्रेस की सत्ता तो है नहीं कि इसके लिए वे कांग्रेस को जिम्मेवार ठहराने जाते ! करीब बारह वर्षों से तो हमारे देश में लगातार भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार है,जिसके मुखिया मोदी जी हैं। देश के सारे तंत्र उन्हीं के इशारे पर काम कर रहे हैं। बीच-बीच में जनता को सपना भी दिखाते रहते हैं कि हमारा देश विश्व गुरु बनने के कगार पर पहुंच गया है। सबका साथ सबका विकास हो रहा है।फिर इसमें अड़चन कहां से पैदा हो गई? जो मोदी जी को ऐसा बयान देना पड़ा कि देश भक्ति का परिचय दीजिए।एक साल सोना खरीदना बंद कर दीजिए, पेट्रोल डीजल की खपत कम हो, इसलिए निजी वाहनों का इस्तेमाल कम से कम कीजिए, विदेशों का टूर मत कीजिए, गैस का इस्तेमाल मत कीजिए। क्या यह सब कुछ प्रधानमंत्री की नाकामियों को नहीं दर्शाता है? इसके लिए मोदी जिम्मेवार नहीं है?

चलिए, थोड़ी देर के लिए लोग यह भी कर सकते हैं कि बीच में ईरान और इजरायल के बीच का युद्ध हो गया, इसलिए हमारे देश को आर्थिक संकट से गुजरना पड़ रहा है। थोड़ी देर के लिए हम इसे भी सच मान ले रहे हैं, तो फिर यहां हमारे देश के अधिकांश लोग इस युद्ध में ईरान के समर्थन में खड़े रहे, वहां मोदी और मोदी की पार्टी इसराइल और अमेरिका के साथ क्यों खड़ी रही ? इसके लिए मोदी जी को कौन -सी व्यक्तिगत विवशता थी कि इन्होंने अमेरिका और इजरायल के सामने घुटने टेक दी ? और फिर व्यक्तिगत विवशता के लिए इन्होंने अपनी जनता को झुलसने के देश को आग में क्यों झोंक दिया? तो फिर देश में इस संकट के लिए कौन जिम्मेवार है?

याद कीजिए उस समय की बात,जब अपने ही देश में मोदी जी ने नोटबंदी लगाई थी, तो इन्होंने कहा था कि इससे बड़े-बड़े उद्योगपतियों, नक्सलियों और आतंकवादियों की कमर टूट जाएगी। काले धन सब खत्म हो जाएंगे। देश हित में अच्छा रहेगा।क्या ऐसा हुआ भी था क्या? यह कौन नहीं जानता है कि सारे के ब्लैक मनी वाइट मनी हो गए थे। आखिर इनकी सत्ता के रहते, सब कुछ कैसे हो गया था और नोटबंदी की मार झेलनी पड़ी थी आम जनता को ?

कोरोना जैसी महामारी में यहां के सारे छोटे-छोटे उद्योग धंधे बंद हो गए। दूसरे इन्होंने जी एस टी लगाकर छोटे-छोटे उद्योग धंधे करने वालों की कमर ही तोड़ डाली थी आम जनता को महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। बड़े उद्योगपति तो आज भी चकलस काट रहे हैं और छोटे छोटे उद्योग धंधे करने वाले हैं बेरोजगार हो गए।इन सबका जिम्मेवार आखिर कौन है ?भाजपा की ही सरकार तो है!

आज जो मोदी जी लोगों को नसीहत दे रहे हैं कि सोना मत खरीदें। तो सीधे सोने की दूकानों को क्यों नहीं बंद करवा देते हैं? एक दिन यही मोदी जी कहते थे कि कांग्रेस की सरकार आ जाएगी तो बेटियों बहनों के मंगल सूत्र छीन जायेंगे। फिर आपके राज्य में तो मंगल सूत्र पर आफ़त आ जाएगी। क्या सभी महिलाएं चांदी और अल्युमीनियम के गहने बनवाएगी? मोदी जी ने कहा कि विदेश का दौरा मत कीजिए, वे पैसे बचाइए, तो विदेशों का दौरा जान सामान्य जनता थोड़ी करने जा रही है ?और जो विदेशों का दौरा करने में सक्षम हैं , वे आपके कहने से थोड़े ही रुक जायेंगे ? जिसके पास अथाह पैसे हैं, वे तो खर्च करना ही चाहेंगे । उन्हें आपकी नसीहत से क्या मतलब है?

मोदी जी नसीहत दे रहे हैं कि पेट्रोल-डीजल कम खर्च कीजिए। गैस की खपत कम कीजिए, तो सवाल उठता है कि जिसने अपनी सुख सुविधा के लिए गाड़ियां खरीद रखी हैं कि इससे अपना रोजगार करने में या ड्यूटी पर जाने के लिए सुविधाएं होंगी। फिर क्या वे आपके कहने से पैदल चलने लगेंगे ? आप ही ने तो गांव-गांव में गैस सिलेंडर का वितरण करवा कर गैस पर खाना बनाने के लिए लोगों को गैस पर निर्भर बना दिया है और फिर आप ही नसीहत दे रहे हैं कि गैस का इस्तेमाल कम कीजिए। तो आखिर आम लोग खाना बनाएंगे किस चीज पर? लकड़ियां तो और अधिक महंगी हो गयी हैं। क्या शहरों के आलीशान भवन में रहने वाले लकड़ियों और उपलों पर खाना बनायेंगे? नहीं तो फिर क्या एक शाम बनाए हुए खाना को ही दिन से लेकर रात तक खाएंगे? क्या एक दिन खाना बना कर रख देंगे, उसे ही दो-तीन दिनों तक खाएंगे? और तो और, ऐसा भाजपा के ही कोई मंत्री, सांसद,विधायक या कोई कार्यकर्ता करेंगे क्या ? तो फिर नसीहत सिर्फ आम जनता को क्यों दे रहे हैं?

हास्यास्पद तो यह है नरेंद्र मोदी को पांच राज्यों के चुनाव के पहले यह सब कुछ याद क्यों नहीं आया? पांच राज्यों के चुनाव खत्म होते ही यह सब क्यों याद आया? चुनाव में सैकड़ों गाड़ियों के साथ रोड शो कर रहे थे, उस समय उन्हें याद क्यों नहीं आया? जब उनकी सभाओं में हजारों गाड़ियों का काफिला पहुंचता था, उस समय याद क्यों नहीं आया? चुनावी सभाओं को संबोधित करने के लिए ताबड़तोड़ हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल हो रहा था,जिससे केंद्रीय मंत्री और अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री जा रहे थे,उस समय क्यों याद नहीं आया? क्या उस समय जहाज, हेलीकॉप्टर और अन्य गाड़ियां बिना पेट्रोल के चल रहे थे ?

और तो और,चुनाव के बाद मोदी या मोदी के वरिष्ठ मंत्री जहां-जहां भी शपथ ग्रहण समारोह में गए। उस समय भी क्यों नहीं याद आया कि एक दो ही लोग चले जाएं? फिर पूरा मंत्रिमंडल उठकर जाने की क्या जरूरत थी? सब कुछ के बाद मोदी ने रोड शो किया । आज भी मोदी पर प्रतिदिन करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। यह अपव्यय हो रहा है कि नहीं ? जिन नेताओं की सुरक्षा में दो-चार पुलिस वालों को रहना चाहिए था, उसे जेड प्लस,वाई प्लस प्लस और न जाने कितनी कितनी सुविधाएं दी जा रही हैं, ये जो पैसे मंत्रियों की सुरक्षा पर खर्च किए जा रहे हैं, वह अपव्यय है या नहीं? किसके पैसे पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, जनता के ही तो?और चले हैं नसीहत देने कि पेट्रोल खर्च कम करें, गैस की बचत करें, सोना मत खरीदें। इससे भी शर्मनाक बातें हो सकती हैं क्या ? आप ऐश कीजिए, आपके लोग ऐश करें और जनता खर्च में कटौती करे?

सच तो यह है कि मोदी से देश संभाल नहीं रहा है। अभी देश भगवान भरोसे चल रहा है और इससे मोदी और मोदी एंड कंपनी को कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है कि देश रसातल में जाएगा या फिर….।

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