West Bengal News : जीत का जश्न या गुंडई?

West Bengal News : पश्चिम बंगाल में पहले से तृणमूल कांग्रेस की सरकार थी। इस बार वहां भारतीय जनता पार्टी बहुमत में आ गई। बहुमत में जनता के समर्थन से आ गयी या फिर चुनाव आयोग द्वारा तिकड़म कर लायी गयी, यह अलग विषय है। 

 

अलखदेव प्रसाद ‘अचल’

न्यूज इंप्रेशन 

Bihar: कहीं भी जब चुनाव होता है, तो कोई न कोई एक पार्टी ही जीतती है या फिर कोई न कोई एक गठबंधन जीतता है और जो पार्टी बहुमत में आती है, उसकी ही सरकार बनती है। जिस पार्टी की सरकार बनती है, उस पार्टी के कार्यकर्ता या समर्थक जीत का जश्न मनाते भी हैं। जिसमें मिठाइयां बांटते हैं, रंग गुलाल उड़ाते सड़क पर निकलते हैं। जश्न मनाना स्वाभाविक भी है। इसमें किसी को कोई आपत्ति भी नहीं रहती है। चुनाव हारने वाली पार्टी में मातम पसरा रहता है।यह भी स्वाभाविक है।परंतु जब जीत का जश्न मनाने में गुंडई और लफंगई का परिचय दिया जा रहा हो, जीत का जश्न हिंसा का रुप ले ले, तब यह विचारणीय विषय बन जाता है। अभी हमारे देश में पांच राज्यों में विधानसभा का चुनाव हुआ। जिसमें पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी राज्य था। जिसमें असम में तो पहले से ही भाजपा की सरकार थी। वहां फिर से उसी की सरकार बन गई। इसीलिए वहां कोई खास फर्क नहीं पड़ा। तमिलनाडु में अभिनेता थलापति विजय की पार्टी टीवीके बहुमत में आ गई और स्टालिन की पार्टी हार गई, स्वाभाविक रूप से वहां भी जीत का जश्न मनाया गया होगा, परंतु वहां से भी जीत के जश्न के दौरान किसी तरह की अनहोनी घटना का समाचार नहीं मिला। केरल में 10 वर्षों से भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की सरकार थी। इस बार वहां कांग्रेस पार्टी बहुमत में आ गई। उसकी सरकार बनने जा रही है, परंतु वहां भी जीत के जश्न में किसी तरह की अनहोनी घटना का समाचार नहीं मिला। 

इस बार पश्चिम बंगाल में भाजपा बहुमत में आ गई

पश्चिम बंगाल में पहले से तृणमूल कांग्रेस की सरकार थी। इस बार वहां भारतीय जनता पार्टी बहुमत में आ गई। बहुमत में जनता के समर्थन से आ गयी या फिर चुनाव आयोग द्वारा तिकड़म कर लायी गयी, यह अलग विषय है। परन्तु अभी भारतीय जनता पार्टी की सरकार का गठन भी नहीं हो सका। मुख्यमंत्री या मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण भी नहीं हो सका कि पश्चिमी बंगाल में जीत के जश्न में भाजपाइयों का नंगा नाच सभी ने देख लिया। भाजपाइयों ने अपनी पार्टी की जीत पर इतने पगला गए कि हिंसात्मक रूप धारण कर लिया। कई तृणमूल कांग्रेस के कार्यालयों को आग के हवाले कर दिया, तो कहीं भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)के कार्यालयों में तोड़फोड़ मचाई। गुंडागर्दी की सारी सीमाएं लांघ दी। और तो और, दशकों से सड़क के किनारे लगी कम्युनिस्टों के धरोहर लेनिन की प्रतिमा को भी नहीं बक्शा। जिस तरह से लेनिन की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया। जिस तरह से गाली गलौज करते हुए जय श्री राम के नारे लगाए, वह सामान्य बात नहीं थी। जिस तरह से हाथ में भाजपा लिये लेनिन की प्रतिमा को ध्वस्त कर रहे थे, उसमें सारे लफंगे हैं और यह भाजपाई थे। और तो और, बंगाल की जीत पर भाजपाइयों ने त्रिपुरा में भी जश्न मनाया और जश्न मनाने के दौरान भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कार्यालयों में जमकर तोड़फोड़ की। जब त्रिपुरा में भाजपा की पहली बार सरकार बनी थी, उस समय भी नंगई की सारी हदें पार कर दी थीं और न जाने भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कितने कार्यालयों को आग के हवाले कर दिया था। आखिर इसे जीत का जश्न कहेंगे या जीत के नाम पर आतंक फैलाना या गुंडई का परिचय देना कहेंगे? 

तृणमूल की सरकार बनी थी तो गुंडई और लफंगई का परिचय दिया था

 सबसे अधिक हास्यास्पद तो यह रहा कि जब भाजपाई सड़कों पर जीत का जश्न मना रहे थे, तो हाथों में लाठी, डंडे लिए हुए थे और जय श्री राम के नारे लगाते हुए आगजनी और हिंसक घटनाओं का अंजाम देते जा रहे थे।जो सवाल पैदा करता है कि अपने को राम भक्त भी कहते हैं। तो फिर क्या राम ऐसे ही लोगों को संरक्षण देते हैं?राम का यही संदेश था। राम का नाम लेकर गुंडई करना आखिर क्या दर्शाता है? और यह सब तब हुआ, जब बंगाल में लाखों सेना के जवान तैनात रहे, पर वैसे लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं कर सके। ऐसा लगा, जैसे उन्हें कुछ पता ही नहीं है। यह बात भी सत्य है कि जब पहली बार बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनी थी तो उसके कार्यकर्ता अपनी गुंडई और लफंगई का परिचय देते हुए ऐसा ही तांडव और दुर्व्यवहार भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के साथ किया था। माकपा के कितने कार्यालयों पर जबरन कब्जा कर लिया था। इस मामले में तृणमूल कांग्रेस भी कम नहीं रही है। जो भी हो, पर एक तरफ अपने को भाजपाई लोग अपने को कट्टर धार्मिक भी मानते हैं और पक्के सनातनी भी मानते हैं। ईश्वर में आस्था रखने वाले भी मानते हैं। तो क्या इनका धर्म यही सिखाता है। लेकिन इन लोगों ने ऐसा करके यह साबित कर दिया कि हमारा धर्म समाज में शांति स्थापित करने वाला नहीं है। हमारा धर्म समाज में हिंसा फैलाने वाला है, नफरत फैलाने वाला है। जो हमारी पार्टी के समर्थन में नहीं रहेगा। जो हमारी पार्टी का विरोध करेगा। उसका अंजाम इसी तरह का होगा। अगर इनलोग ऐसा करके यही संदेश देना चाहते हैं कि देश में रहना है तो भाजपा भाजपा करना होगा, तो क्या इससे देश में अस्थिरता पैदा नहीं होगी? समाज में नफरत नहीं बढ़ेगा? और फिर बढ़ेगा तो इसका अंजाम क्या होगा? क्योंकि जब इन लोग ऐसा करेंगे, तो उनके विरोधी हाथ पर हाथ रखकर थोड़े ही बैठेंगे ? और फिर प्रतिशोध में उन लोग भी ऐसा करने लगेंगे, तो फिर समाज किस दिशा में जाएगा? यह आज के लिए गंभीर विषय बन गया है। गंभीर विषय यह भी बन गया है कि जिस दिन भाजपा देश के संपूर्ण राज्य में अपनी सरकार बना लेगी, उस दिन देश की दशा कैसी होगी? क्या भारत में श्रीलंका या नेपाल जैसा परिदृश्य देखने के लिए नहीं मिल सकता है? इसका जिम्मेवार कौन होगा?        

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