Dimagi Naxali News: दिमाग़ी चाल तो नहीं है दिमाग़ी नक्सली

Dimagi Naxali News: सरकार कुछ भी करती रहे, जनता को आवाज उठाने की जरूरत नहीं है। नहीं तो सरकार अर्बन नक्सल या दिमागी नक्सल के नाम पर कोई भी कार्रवाई कर सकती है।

 

अलखदेव प्रसाद ‘अचल’

न्यूज इंप्रेशन 

Bihar: जब देश का प्रधानमंत्री अपने ही देश के जागरूक वैसे लोगों को जो सरकार की नाकामियों को उजागर करता हो, सरकार की नाकामियों पर आंदोलित होता हो, इसके लिए सरकार से सवाल करता हो, अपने अधिकार की मांग करता हो। अपनी समस्याओं का समाधान करने के लिए सरकार का ध्यानाकृष्ट करता हो, उसे जब कभी अर्बन नक्सल, तो कभी दिमागी नक्सल के नाम से संबोधित कर लोगों को दिग्भ्रमित किया जाने लगे, तो समझिए, यह फासीवादी सरकार का संकेत है। यह संकेत है कि सरकार कुछ भी करती रहे, जनता को आवाज उठाने की जरूरत नहीं है। नहीं तो सरकार अर्बन नक्सल या दिमागी नक्सल के नाम पर कोई भी कार्रवाई कर सकती है। इसे सरकार की धमकी भी कह सकते हैं। ऐसी सरकार निरंकुश सरकार कहलाती है। जिससे सरकार में रह रहे लोगों के स्वार्थ की सिद्धि भले होती है, परंतु जाम जनता का हित नहीं होता है। आज की सरकार में यही देखने के लिए मिल रहा है।

एक साल में जो जो वादे किए थे, उसे कहां तक पूरे किए

प्रधानमंत्री ने दिमागी नक्सल कह तो दिया, परंतु प्रधानमंत्री को शायद यह समझ में नहीं आया होगा कि हमारे देश की जनता इतनी भी मूर्ख नहीं है कि हमने जो कह दिया, उस पर विश्वास कर उसे अक्षरशः सत्य मान लेगी। यह उनकी भूल है। क्योंकि देश में उनसे भी अधिक समझदार लोगों की कमी नहीं है। यहां की जनता सब कुछ समझती है। यह समझती है कि सरकार को जो काम करना चाहिए, उसे न कर इधर-उधर की बातों में जनता को उलझाना चाहती है। जनता को भटकाना चाहती है।

लाल किले के प्राचीर से लोग प्रधानमंत्री के मुंह से देशहित से संबंधित बातें सुनने के लिए एकत्रित होते हैं या फिर उनके लाइव सुनना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री बताएंगे कि हमने एक साल में जो जो वादे किए थे, उसे कहां तक पूरे किए, फिर आने वाले एक साल में हमने क्या-क्या करने के लिए सोचा है। जिससे देश में खुशहाली आ सके। जो जनहित के लिए काम आ सके। इसके बजाय जब देश का प्रधानमंत्री पूरा भाषण ही विपक्षियों को कोसने पर देने लगे। पूरा भाषण ही अपनी डींग हांकने में लगा दे। लोगों को अर्बन नक्सल और दिमागी नक्सली कहकर सिर्फ जनता का दिमाग भटाकने लगे, तो इसे क्या कहा जाएगा? फिर प्रधानमंत्री के भाषण को कौन तवज्जो देने जाएगा? सिर्फ अंध भक्त तालियां पीट रहें। पर अन्य लोग तो ऐसे प्रधानमंत्री पर छींटाकशी करेंगे ही। सरकार को कोसेंगे ही। इसे कौन नहीं जानता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 12 वर्षों से लाल किले के प्राचीर से सिर्फ डींग ही हांकते आ रहे हैं। करनी तो कुछ है नहीं। 12 वर्षों से सिर्फ यही रट लगाए हुए हैं कि कांग्रेस ने क्या किया? अगर कांग्रेस ने नहीं किया, तो आपको तो करना चाहिए और यह बताना चाहिए कि देखिए हमने क्या किया? पर अभी तक यह नहीं कहा कि हमने क्या किया, जिस पर हमारा देश गौरवान्वित हो सके। जो भी बोला, झूठ बोला।

सरकार नहीं चाहती कि लोग सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर सकें

प्रधानमंत्री जिन लोगों को दिमागी नक्सली कह रहे थे, क्या सचमुच में वे ही लोग दिमागी नक्सली हैं या फिर खुद प्रधानमंत्री, उनके मंत्री, सांसद और अन्य कार्यकर्ता दिमागी नक्सली हैं। ऐसा नहीं होता कि कोई प्रधानमंत्री जिस पर आरोप लगा दे, सिर्फ वही गलत रहता है। अगर प्रधानमंत्री अपनी क्रूरता और निकम्मेपन का परिचय देता है, तो वह भी गलत रहता है।

प्रधानमंत्री ने दिमागी नक्सली उन लोगों के लिए कहा, जो यहां सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। जो पढ़े-लिखे नौजवान सरकार से रोजगार मांग रहे हैं। जो लोग सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं। जो लोग सरकार की नाकामियों को उजागर कर रहे हैं। जो लोग सरकार की वादा खिलाफी के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं। जो प्रजातांत्रिक देश में जनता का अधिकार है। परंतु सरकार नहीं चाहती कि यहां के लोग सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर सकें। सरकार की नाकामियों को उजागर कर सकें।

प्रधानमंत्री को सिर्फ अपने गुर्गे ही अच्छे लगते 

प्रधानमंत्री को अपनी ही पार्टी के मंत्री, सांसद एवं अन्य कार्यकर्ता दिमागी नक्सली नजर नहीं आते, जो धर्मनिरपेक्ष देश में जबरन मस्जिदों और चर्चों पर जबरन चढ़कर भगवा झंडा लहरा देते हैं। मुसलमान और ईसाइयों पर अपशब्दों की बौछार करते हैं। रात- दिन नफरत की आग उगलते रहते हैं। हमेशा सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का काम करते हैं। दलितों पर अत्याचार करते हैं। दलित महिलाओं को अपनी हवस का शिकार बना लेते हैं। समय-समय पर साम्प्रदायिक हिंसा की आग भड़काते रहते हैं। समय-समय पर मॉब लीचिंग करते रहते हैं। ऐसे लोग प्रधानमंत्री को भी देशभक्त नजर आते हैं। जो मंदिरों से करोड़ों अरबों का चंदा चोरी कर ले रहे हैं। वे असली राम भक्त नजर आते हैं। और इन सब पर आवाज उठाने वाले प्रधानमंत्री को दिमागी नक्सली नजर आते हैं। प्रधानमंत्री का मतलब यह नहीं होता कि जो भी मन में आये, अनाप-शनाप बक दे। क्योंकि प्रधानमंत्री की अपनी गरिमा होती है। प्रधानमंत्री जब गरिमा में रहकर कोई बात बोलता है, तभी देश की आम जनता उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा करती है। लेकिन यहां तो देखा जा रहा है कि प्रधानमंत्री को सिर्फ अपने गुर्गे ही अच्छे लगते हैं। इसके अलावे अन्य लोग उन्हें देश का दुश्मन नजर आते हैं। फिर देश की आम जनता ऐसे प्रधानमंत्री को कैसे सम्मान की दृष्टि से देख सकती है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *