Jan Sanskriti Manch Meeting: साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों, जनचेतना बदलाव का है सशक्त माध्यम

Jan Sanskriti Manch Meeting: जन संस्कृति मंच (जमस) की बैठक रविवार को ज म स के बोकारो जिला अध्यक्ष ओम राज अज्ञानी के आवासीय कार्यालय में की गई। मंच की आगामी रणनीति, संगठनात्मक गतिविधियों में तेजी लाने तथा साहित्य, कविता और रंगमंच के माध्यम से सामाजिक चेतना व सकारात्मक बदलाव की दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य करने की चर्चा की गई।

न्यूज इंप्रेशन, संवाददाता 

Bokaro: जन संस्कृति मंच (जमस) की एक विशेष बैठक रविवार को ज म स के बोकारो जिला अध्यक्ष ओम राज अज्ञानी के आवासीय कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक में मंच की आगामी रणनीति, संगठनात्मक गतिविधियों में तेजी लाने तथा साहित्य, कविता और रंगमंच के माध्यम से सामाजिक चेतना एवं सकारात्मक बदलाव की दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य करने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि बोकारो जिले में जन संस्कृति मंच की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को और अधिक सक्रिय किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी लेखक एवं पत्रकार हरेन्द्र मिश्रा को दी गई। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि साहित्य को केवल मनोरंजन का माध्यम न बनाकर उसे सामाजिक सरोकारों, जनचेतना और बदलाव का सशक्त माध्यम बनाया जाए।

साहित्यिक गतिविधियों को गति देने के लिए सक्रिय सहयोग 

गिरिडीह कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं साहित्यकार प्रो. बलभद्र ने बोकारो क्षेत्र में साहित्यिक गतिविधियों को गति देने के लिए सक्रिय सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि साहित्य में रुचि रखने वाले लोगों को एक मंच पर लाने के लिए कम से कम महीने में एक बैठक आयोजित की जानी चाहिए।

ऐसी बैठकों के माध्यम से नए लेखकों, कवियों और साहित्यप्रेमियों को प्रोत्साहित किया जा सकता है। धनबाद से पहुंचे लेखक एवं पत्रकार कमलेश ने भी जन संस्कृति मंच की गतिविधियों को तेज करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कविता और साहित्य सामाजिक एवं राजनीतिक बदलाव के लिए बेहद प्रभावशाली और अचूक अस्त्र साबित हो सकते हैं। साहित्य समाज की संवेदनाओं को आवाज देता है और लोगों को अपने समय की चुनौतियों के प्रति जागरूक करने का काम करता है।

सांस्कृतिक गतिविधियों को व्यापक बनाने की जरूरत

पटना से पहुंचे रंगमंच से जुड़े सुनील सरीन ने अपने क्षेत्र में चल रही सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी साझा की। उन्होंने भी सांस्कृतिक गतिविधियों को व्यापक बनाने तथा रंगमंच और साहित्य को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। बैठक का संचालन जन संस्कृति मंच के अध्यक्ष ओम राज अज्ञानी ने किया। उन्होंने अपनी कुछ समसामयिक कविताओं का पाठ भी किया। उनकी कविताओं में वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों और आम आदमी के सरोकारों की झलक देखने को मिली।

सामूहिक रूप से काम करने का संकल्प लिया

इस मौके पर आरपी वर्मा तथा ज म स से जुड़े उपाध्यक्ष सह टू सोशल ग्रीन अर्थ फाउंडेशन के निदेशक एवं टू गांधीअन्स के संचालक नरेंद्र सहित अन्य साहित्यप्रेमी एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बैठक के अंत में सभी सदस्यों ने साहित्य, कविता, नाटक और अन्य सांस्कृतिक माध्यमों के जरिए सामाजिक चेतना को मजबूत करने तथा बोकारो में साहित्यिक गतिविधियों को नियमित और व्यापक बनाने के लिए सामूहिक रूप से काम करने का संकल्प लिया। बैठक का मूल संदेश यही रहा कि जब साहित्य समाज के सवालों से जुड़ता है, तो वह केवल शब्द नहीं रहता-वह चेतना और बदलाव की आवाज बन जाता है।

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