Vote Chor Gaddi chhod Maharaili : कांग्रेस की वोट चोर-गद्दी छोड़ महारैली का निहितार्थ
Vote Chor Gaddi chhod Maharaili : 14 दिसंबर को रामलीला मैदान बनने जा रहा है : एक और ऐतिहासिक घटना का साक्षी!
लेखक: एचएल दुसाध
न्यूज इंप्रेशन
Delhi: कई ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रामलीला मैदान 14 दिसंबर को एक और ऐतिहासिक घटना का साक्षी बनाने जा रहा है. मुख्यतः हर साल होने वाली भव्य रामलीला के लिए मशहूर दिल्ली का रामलीला मैदान राजनीति से जुड़ी घटनाओं के लिए खासतौर से चर्चा में रहा है. पक्ष-विपक्ष किसी भी दल को किसी समस्या पर अवाम को भारतमय संदेश देना होता है, तो वह दिल्ली के ह्रदय स्थली में अवस्थित 12 एकड़ में फैले रामलीला मैदान को चुनता है. यहां पर कांग्रेस, भाजपा सहित अन्य दलों, संगठनों व धार्मिक संगठनों के कई एतिहासिक कार्यक्रम होते रहे हैं. धार्मिक-राजनीतिक संदेश देने के साथ जब किसी विदेशी वीआईपी का स्वागत करना होता तो इस स्थान को ही चुना जाता है.
एलिजाबेथ ने रामलीला मैदान में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था
28 जनवरी, 1961 को ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ ने रामलीला मैदान में ही एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था. 26 जनवरी, 1963 को प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की उपस्थिति में लता मंगेश्कर ने यहीं पर 1962 के भारत- चीन युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए, ऐ मेरे वतन के लोगों जैसा अमर गीत गया था, जिसे सुनकर नेहरु रो पड़े थे ! 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने इसी मैदान पर एक विशाल जनसभा में जय जवान, जय किसान का नारा एक बार फिर दोहराया था. 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश के निर्माण और पाकिस्तान से युद्ध जीतने का जश्न मनाने के लिए इसी मैदान को चुना था. 25 जून, 1975 को इसी मैदान पर जय प्रकाश नारायण ने विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर, इंदिरा गांधी की तानाशाही सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया था. फरवरी 1977 में विपक्षी पार्टियों ने एक बार फिर इसी मैदान को अपनी आवाज़ जनता तक पहुंचाने के लिए चुना था.
देश का संविधान, लोकतंत्र और अपने बच्चों के भविष्य के लिए एकजुट होना होगा
80 और 90 के दशक के दौरान विरोध प्रदर्शनों की जगह बोट क्लब बन गई थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के कार्यकाल के दौरान बोट क्लब पर प्रदर्शन पर रोक की वजह से इसी मैदान को भारतीय जनता पार्टी ने राम मंदिर आंदोलन के शंखनाद के लिए चुना था .यही वह रामलीला मैदान है जहां से 2011 में बाबा रामदेव और अन्ना– केजरीवाल ने काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन छेड़ कर उथल-पुथल मचा दिया था. कई ऐतिहासिक धार्मिक-सांस्कृतिक और राजनीतिक घटनां का साक्षी उसी रामलीला मैदान से 14 दिसंबर को राहुल गांधी के आह्वान पर उनके मिशन मैन डॉ. अनिल जयहिंद के नेतृत्व में कांग्रेस ‘वोट चोर–गद्दी छोड़’ महारैली करके एसआईआर की खतरनाक प्रक्रिया से लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई छेड़ने जा रही है! इस महारैली को सफल बनाने की अपील करते हुए कांग्रेस के एससी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेन्द्र पाल गौतम ने कहा है, ’मेरा पूरे देशवासियों से निवेदन है कि यह आजादी की दूसरी लड़ाई है. हमें देश का संविधान, लोकतंत्र और अपने बच्चों के भविष्य के लिए एकजुट होना होगा. आज अगर हम खामोश रहे तो आने वाली पीढियां हमें माफ़ नहीं करेंगी!’ महारैली से होगी वोट चोरों के चंगुल से भारतीय लोकतंत्र को वापस पाने की लड़ाई की शुरुआत 14 दिसंबर को रामलीला मैदान में आयोजित होने जा रही महारैली के विषय में जानकारी देते हुए कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा है, ’वोट चोरी का साया आज हमारी डेमोक्रेसी पर मंडरा रहा सबसे बड़ा खतरा है. हमारे संविधान को ख़त्म करने की इन कोशिश के खिलाफ पूरे देश में मैसेज देने के लिए कांग्रेस 14 दिसंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट चोर- गद्दी छोड़’ महारैली करेगी. हमें भारत के कोने- कोने से करोडो हस्ताक्षर मिले हैं. लोगों ने बीजेपी- चुनाव आयोग के गलत तरीकों से, जैसे फ़र्जी वोटर को जोड़ने, विरोधी वोटरों को हटाने और बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में हेराफेरी करने को गलत ठहराया है. इतना ही नहीं, हर भारतीय ने देखा है कि चुनाव आयोग कैसे नियमों को तोड़ता है, एमसीसी के उल्लंघन को नजरअदाज करता है और बीजेपी को चुनाव में धांधली करने में मदद करने के लिए दिनदहाड़े रिश्वत देता है. चुनाव आयोग जो कभी एक न्यूट्रल अम्पायर था, अब एक खुलेआम पार्टी का खिलाड़ी बन गया गया है, जो चुनावों में बराबरी के मौके के कांसेप्ट को ख़त्म कर रहा है. जब चुनाव सिस्टम पर यह हमला हमारी आँखों के सामने हो रहा है , तो हम चुप नहीं रहेंगे. यह महारैली से वोट चोरों के चंगुल से भारतीय लोकतंत्र को वापस पाने की हमारी लड़ाई की बस शुरुआत है. ’14 दिसंबर की प्रस्तावित महारैली में देश भर के कांग्रेसी कार्यकर्त्ता और नेता शामिल होंगे. इसे सफल बनाने के लिए हर प्रान्त में ब्लॉक से लेकर जिले स्तर पर बैठकें हो रही हैं. बैठकों के जरिये अधिक से अधिक लोगों को कैसे 14 दिसंबर की महारैली में लाया जाय, इसकी योजना बनाई जा रही है. भीड़ जुटाने के लिए अलग-अलग राज्यों को टारगेट दिए गए हैं. दिल्ली के पड़ोसी राज्यों: पंजाब, हरियाणा, यूपी, और राजस्थान के साथ मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ पर भीड़ जुटाने की ज्यादा जिम्मेवारी है. कुल मिलाकर कांग्रेस की ओर से जो तैयारी चल रही है, उसे देखकर लगता है 14 दिसंबर को रामलीला मैदान के सुनहले इतिहास में एक और यादगार अध्याय जुड़ेगा!
एसआईआर के जरिये मोदी सरकार कर रही है : लोकतंत्र को अपहृत करने की साजिश
एसआईआर के जरिये मोदी सरकार वोट चोरी की जो परिकल्पना कर रही है, उसके खिलाफ एकजुट होना आज इतिहास की सबसे बड़ी जरुरत बन गई है, इसकी उपलब्धि चाहे कोई और करे या न करे, आंबेडकरवादियों को जरुर करनी चाहिए. आज आंबेडकरवादियों को यह बात गांठ बाँध लेने की जरुरत है कि केचुआ के सहयोग से मोदी सरकार ने लोकतंत्र को अपहृत कर देश को चुनावी निरंकुशता वाले देशों की श्रेणी में पहुंचा दिया गया है. विश्व के विभिन्न संस्थान, जो दुनिया के लोकतान्त्रिक मूल्यों का अध्ययन करते हैं, ने निष्कर्ष दिया है कि भारत चुनावी निरंकुशता वाले देशों की श्रेणी में आ गया है और ‘बंद लोकतंत्र’ की ओर अग्रसर है.चुनावी निरंकुशता एक ऐसी संकर व्यवस्था है, जिसमें नियमित चुनाव होते हैं , लेकिन ये चुनाव लोकतान्त्रिक स्वतंत्रता और निष्पक्षता के मानको को पूरा नहीं कर पाते.भारत में निरंकुशता की स्थिति बांग्लादेश और नेपाल से भी ख़राब है. प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी नीतियों से शक्ति के स्रोतों पर हिन्दू ईश्वर के उत्तमांग से जन्मे लोगों 80 से 90 % कब्ज़ा जमवा कर संविधान को काफी हद व्यर्थ कर ही दिया है, अब केचुआ के सहयोग से देश में चुनावी निरंकुशता को बढ़ावा देकर को संविधान को पूरी तरह प्रभावहीन करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है और इसमें जरिया बन रहा है ; एसआईआर(विशेष गहन संशोधन)! एसआईआर से पैदा हो गया है : वोटाधिकार खोने और हिन्दू राष्ट्र का खतरा काबिले गौर है कि फरवरी 2023 के रायपुर अधिवेशन के बाद से जिस तरह राहुल गांधी ने सामाजिक न्याय के एजेंडे हो शिखर प्रदान कर दिया है, उससे हिन्दुत्ववादी भाजपा के लिए चुनाव जीतना मुश्किल हो गया है. इसका प्रमाण 2024 लोकसभा चुनाव में मिला, जब चुनाव आयोग का सहयोग लेकर मोदी खुद को निश्चित हार से बचाने तथा विपक्ष को सत्ता में आने से रोकने में सफल हुए थे.
आरक्षण से महरूम करने के लिए सरकारी उपक्रमों को बेचने जैसा देश विरोधी कृत्य अंजाम
लोकसभा में अपनी हार टालने के बाद मोदी केचुआ के सहारे एसआईआर की प्रक्रिया चला कर लोकतंत्र को अपहृत करने की दिशा में अग्रसर हुए और बिहार में मनचाहा परिणाम पाने के बाद 12 राज्यों में यह प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है. एसआईआर की यह प्रक्रिया अब उन दलित, आदिवासी और पिछड़ों को मताधिकार से वंचित करने का जरिया बन गई है, जिनका राजनीति में हस्तक्षेप हिन्दू धर्म में अधर्म घोषित रहा है. राजनीति में इनका हस्तक्षेप हिन्दू धर्म के विरुद्ध होने के कारण ही हिन्दुत्ववादी मोदी सरकार इनको वोटाधिकार से वंचित करने के लिए निर्ममता से वैसा ही लोकतंत्र विरोधी उपक्रम चलाएगी जैसा, आरक्षण से महरूम करने के लिए सरकारी उपक्रमों को बेचने जैसा देश विरोधी कृत्य अंजाम दी. यह देश विरोधी काम इसलिए अंजाम दिया गया क्योंकि आरक्षण से दलित-पिछडन को उन पेशों को अपनाने का अवसर मिल जाता था, जो पेशे/ कर्म हिन्दू धर्मशास्त्रों द्वारा इनके लिए अधर्म घोषित रहे. एसआईआर की प्रक्रिया के जरिये मोदी सरकार हर राज्य में लाखों – करोडो वोट दो कारणों से काटेगी. एक तो इससे चुनाव में विजय सुनिश्चित कर लेगी, दूसरा, दलित, आदिवासी , पिछड़ों को राजनीति के अधिकार से वंचित का पुण्य का काम कर लेगी. एसआईआर के जरिये मोदी सरकार 12 राज्यों के 321 जिले और 1,843 विधानसभा क्षेत्रों के दलित बहुजनों उस वोट की शक्ति से महरूम करने जा रही है, जिसे बाबा साहेब आंबेडकर ने संविधान के जरिये सुलभ कराकर दुनिया के सबसे अधिकारविहीन लोगों को शासक बनने की जमीन सुलभ करा दी थी. दलित – बहुजनों की भारत में जो भी अहमियत है, वह वोट की ताकत के चलते हैं. एसआईआर ने इसी ताकत से महरूम होने का खतरा पैदा कर दिया है, इसलिए इसके खिलाफ लड़ाई में एकजुट होना बहुजनों के वजूद रक्षा के लिए एक अत्याज्य कर्तव्य बन गया है.लेकिन एसआईआर का संभावित परिणाम जानने के बावजूद विपक्षी दल और बहुजन एक्टिविस्ट इसके विरुद्ध अपेक्षित मात्रा में सक्रिय नहीं हैं, इसलिए निकट भविष्य में भारत का हिन्दू राष्ट्र घोषित और इसमें मनुस्मृति आधारित संविधान लागू होना तय सा दिख रहा है. ऐसे में एसआईआर के जरिये वोटाधिकार खोने और हिन्दू राष्ट्र का जो खतरा सिर पर मडरा है,उसका सामना करने के लिए दलगत भावना से ऊपर समस्त आंबेडकरवादियों को अपनी मुक्ति के लिए दूसरी आजादी की लड़ाई की भांति एकजुट होना होना इतिहास की बहुत बड़ी जरुरत बन चुकी है! एसआईआर के खिलाफ एकजुट होने के लिए आंबेडकरवादी बाबासाहेब का यह ऐतिहासिक कथन भी एक बार याद कर लें, ’अगर हिन्दू राष्ट्र मूर्त रूप लेता है तो इस देश के लिए बड़ा खतरा पैदा हो जायेगा. हिन्दू कुछ भी कहें पर, हिन्दू राज स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के लिए एक आफत है.इस आधार पर हिन्दू राज को हर कीमत पर रोका जाना चाहिए!‘
(लेखक अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (ओबीसी विभाग) के एडवाइजरी कमेटी के सदस्य हैं)
