पलायन की भेंट चढ़ा 19 वर्षीय संतोष, रोजगार की तलाश में गया था महाराष्ट्र, मौत की खबर सुन परिवार पर टूटा दु:खों का पहाड़

सार

•पलायन की भेंट चढ़ा 19 वर्षीय संतोष महतो।

•रोजगार की तलाश में गया था महाराष्ट्र, पहुंचा शव 

•बोकारो जिले के नावाडीह प्रखंड के ऊपरघाट के पलामू पंचायत के कोडा डीह का था निवासी

 

अमित कुमार महतो

 न्यूज़ इंप्रेशन, संवाददाता

Bokaro : रोजगार के लिए युवकों का पलायन करना और नौकरी के दौरान मौत की खबर झारखंड के लिए बड़ी त्रासदी है। आए दिन ऐसी खबरें सुनने को मिलती है कि घर की खराब आर्थिक स्थिति के चलते बेरोजगार युवक रोजगार की तलाश में गुजरात महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और दिल्ली आदि राज्यों में जाता है। और कभी कभार खबर आती है कि युवक का काम करने के दौरान मौत हो गई, ऐसे में शव पहुंचने पर परिवार ही नहीं, पूरे गांव में मातम छा जाता है। हाल में इस तरह की खबर बोकारो जिले के नावाडीह प्रखंड के ऊपरघाट अंतर्गत पलामू पंचायत के कोडा डीह में सुनने और पढ़ने को मिला। इस गांव के ईश्वर महतो के 19 वर्षीय पुत्र संतोष महतो बीते तीन माह पूर्व परिवार की दयनीय स्थिति के कारण काम की तलाश में अपने साथियों के साथ महाराष्ट्र गया था। साथियों के साथ रात्री में एक साथ खाना पीना खाया और सो गया, सुबह जागने पर नहीं जगा। बीते रविवार की शाम संतोष का शव पैतृक गांव पलामू के कोडा डीह पहुंचा। शव के पहुंचते ही पूरे गांव में मातम छा गया।

एक माह का मिला था वेतन

संतोष अपने साथियों के साथ महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिला अंतर्गत जिलानी कंपनी मछली फैक्ट्री में कार्य कर रहा था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संतोष अपनी कमाई का एक माह का मानदेय मिला था। साथियों के साथ रात्री में एक साथ खाना पीना खाया। सुबह में सभी लोग उठे, जब संतोष सुबह में नहीं उठा तो लोग उसे उठाने गए। जब जगाने पर नहीं नही जगा तो उसके साथी तुरंत अस्पताल लेकर गए। जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। 

साथियों ने दी मौत की सूचना

साथियों ने मौत की सूचना घरवालों को दी। मौत की खबर सुनते ही घर में मातम छा गया और विलाप करने लगे। परिजनों के रोने की आवाज सुनकर पड़ोस के लोग घर में पहुंच गए। बताया जाता है कि कंपनी ने हवाई जहाज से संतोष के शव को रांची भेजा। रांची हवाई अड्डे से उसके शव को एंबुलेंस से रविवार की शाम लगभग 6:00 बजे पैतृक गांव पलामू के कोडा डीह पहुंचा। जैसे ही गांव में सभी की आंखे नम हो गई। परिजन सहित अन्य महिलाएं जोर जोर से विलाप करने लगी। रोने के आवाज सुनकर भरी भीड़ लग गई। परिवार के लोगों को रो रो कर बुरा हाल हो गया। वहीं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते हुए संतवाना दिए। ग्रामीणों का कहना है कि बोकारो जिले के रोजगार एक बड़ी समस्या बन गई है। युवकों को रोजगार कैसे मिले इस ओर ना सरकार का ध्यान है ना ही जनप्रतिनिधियों का। मालूम हो कि कुछ दिन पहले नौकरी की तलाश में गए युवक का भी शव इलाके में लौटा था।

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