Bokaro Band :नियोजन नीति के विरोध में झारखंड राज्य स्टूडेंट यूनियन ने किया 48 घंटे का बंद, शहरी क्षेत्रों के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में रहा बंद का खासा असर
सार
•पेटरवार, कसमार व बेरमो कोयलांचल क्षेत्र में बंदी का असर देखा गया।
•बोकारो व चास में बंदी का रहा आंशिक असर।
•सरकार पर लगाया छलने का आरोप, कहा लाठी-डंडों से नहीं डरते हम।
न्यूज इंप्रेशन, संवाददाता
Bokaro: नियोजन नीति के विरोध में झारखंड राज्य स्टूडेंट यूनियन ने 10 व 11 जून यानी दो दिवसीय बंदी का आह्वान किया है। बोकारो जिले में शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा कसमार पेटरवार, बेरमो सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों बंद का जोरदार असर रहा। वहीं शहरी क्षेत्र चास व बोकारो में आंशिक असर दिखा। सड़कों पर आवागमन जारी रहा। बोकारो रेलवे स्टेशन से यात्रियों को अपने घर तक सफर करने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। धनबाद से बोकारो आने वाले लोगों को रास्ते में किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई। बंदी के पहले दिन शहरी क्षेत्र सेक्टर 4 सिटी सेंटर, सेक्टर 9 बी रोड, चास, जोधाडीह मोड, सिवनडीह, रितुडीह सहित अन्य बाजार आम दिनों की तरह खुले रहें। पहले आम दिनो की तरह खुले रहे। तेज धूप और गर्मी के कारण दोपहर में सड़कों पर लोगों का आवागमन कम रहा। दुंदीबाद बाजार में सुबह 4 बजे से ही दूसरे राज्यों से मालवाहक वाहन पहुंचने शुरु हो गएं थे।
करीब एक घंटे तक एनएच रहा जाम
झारखंड स्टेट स्टूडेंट्स यूनियन के पेटरवार इकाई की ओर से राष्ट्रीय राज मार्ग 23 को पेटरवार तेनुचौक में जाम कर दिया गया। 60:40 नियोजन नीति के विरोध में क्षेत्र के सभी छात्र, छात्राएं व अभिभावकों ने सड़क मार्ग को जाम किया। करीब एक घंटे तक चली जाम के कारण पेटरवार-रामगढ, पेटरवार-बोकारो, पेटरवार-गोमिया ओर पेटरवार-कसमार पथ पर वाहनों की कतार लग गयी। इस भीषण गर्मी के बावजूद आंदोलनकारी व यूनियन के सदस्यों सड़क जाम में मुस्तैदी के साथ डटे रहें। एक घंटे तक चली सड़क जाम के कारण सफर पर निकले यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सड़क जाम के दौरान हेमंत सोरेन मुर्दाबाद नारे लगा रहे थे। पेटरवार थाना प्रभारी विनय कुमार के मान मनोव्वल के बाद आंदोलनकारियों ने सड़क जाम वापस लिया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मनोहर कुमार महतो ने कहा कि नियोजन नीति के विरोध में सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन किया जा रहा है। झारखंड सरकार ने जो 60:40 की नियोजन नीति बनाई है वह झारखंडी हित में नहीं है, बल्कि यह नियोजन नीति बाहरी लोगों के हित के लिए बनाई गई है। झारखंड स्टेट स्टूडेंट्स यूनियन के सदस्यों ने 11 जून को सुबह 7:00 बजे से पुनः पेटरवार तेेनुचौक को जाम करने का निर्णय लिया। आंदोलन में अरविंद महतो, सिंटू महतो, अशोक महतो , संतोष कुमार महतो, पप्पू महतो, देवानंद महतो, वकील महतो, उमेश महतो, संजय महतो, तारकेश्वर महतो,संदीप महतो, महेंद्र महतो, पिंटू महतो, सनोज कुमार, राहुल कुमार, दयाल कुमार, राकेश कुमार महतो सहित सैकड़ों ने हिस्सा लिया।

समर्थकों ने कहा लाठी-डंडों से हम नहीं डरते
बंद को लेकर बेरमो पुलिस प्रशासन की जगह-जगह पर तैनाती की गयी है। फुसरो निर्मल चौक के समीप जैनामोड और डुमरी मार्ग पर आवागमन को बाधित कर दिया गया है। सड़क के दोनों ओर वाहन की लंबी लाइन लग गई। स्वयं सड़क पर उतरकर सरकार के नीति के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी है। लंबी दूरी की बसों के नहीं चलने से यात्री को भी काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा। बाजार आने-जाने में भी लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सरकार पर लगाया छलने का आरोप, कहा लाठी-डंडों से नहीं डरते हम।

बाहरी विधायक नाय चलतो के नारे
झारखंड बंद का असर कसमार में रहा। सुबह से ही छात्र सड़क पर निकलकर पिरगुल, खैराचातर, बगदा, कसमार समेत प्रखंड के सभी दुकानों को बंद कराया, जिसके बाद छात्र बहादुरपुर एनएच 23 को घंटों जाम कर दिया। बंद समर्थकों नियोजन निति 60-40नियोजन निति नाय चलतो खतियान आधारित स्थानीय नीति लागू करने की मांग कर रहे थे। सड़क पर गाड़ियों की लंबी कतार लग गयी। पेटरवार की ओर से आ रहे बोकारो विधायक बिरंची नारायण भी जाम फंसे थे। विधायक को देखते ही बंद समर्थकों ने झारखंड विरोधी विधायक हाय-हाय, बाहरी विधायक नाय चलतो के नारे लगाने लगे। बोकारो विधायक ने छात्रों को समझाते हुए कहा कि 60-40 का विरोध सबसे पहले हमने ही किया था। झारखंडी हित में सरकार जो भी फैसला लेंगी सभी नीतियों का हम समर्थन करेंगे। छात्र आज सड़क पर हैं, सरकार को अविलंब छात्र हित में फैसला लेना चाहिए। सूचना पाकर पहुंचे जरीडीह थाना प्रभारी ने जामकर्ताओं को समझाने का प्रयास किया। इस दौरान इस मार्ग से गुजर रहे बिहार के औरंगाबाद सांसद सुशील कुमार सिंह भी सड़क जाम में फंस गये। जरीडीह थाना पुलिस द्वारा काफी मशक्कत के बाद उन्हें पार कराया। इस दौरान झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति के कसमार इकाई के अमर लाल महतो, भुनेश्वर महतो, सृष्टिधर महतो, सुभाष चंद्रा, राकेश कुमार, विष्णु महतो, सोहराय महतो, यादव महतो, सूजीत कुमार, जीतेंद्र कुमार, रवींद्र कुड़मी, खिरोधर महतो, सुबोध महतो, विकास महतो, समीर मुंड़ा, बिनोद महतो, अजय कुमार महतो आदि मौजूद थे।
