Bihar Vidhansabha Analyse News: हिन्दू धर्माधारित सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था से प्रेरित है: 272 समूह की सक्रियता! 

Bihar Vidhansabha Analyse News: मोदी-शाह जननायक को कमजोर करने के लिए कांग्रेस को तोड़ने में जुट गए हैं. इंडिया गठबंधन में शामिल कुछ दल कांग्रेस से नाता तोड़ने का संकेत करने लगे हैं 

 लेखक: एचएल दुसाध 

न्यूज इंप्रेशन 

Delhi: जो राहुल गांधी मोदी-शाह, हिन्दुत्ववादी मीडिया इत्यादि द्वारा खड़े किये गए तमाम बाधा-विघ्नों को जय कर ‘जननायक’ की भूमिका में उत्तीर्ण हो चुके तथा लोकप्रियता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को बहुत पीछे छोड़ चुके हैं, बिहार विधानसभा का चुनाव परिणाम आने के बाद से उनपर नए सिरे से हमले शुरू हो गए हैं. मोदी-शाह जननायक को कमजोर करने के लिए कांग्रेस को तोड़ने में जुट गए हैं. इंडिया गठबंधन में शामिल कुछ दल कांग्रेस से नाता तोड़ने का संकेत करने लगे हैं और कई बुद्धिजीवी उन्हें इंडिया गठबंधन का नेतृत्व राहुल के बजाय दूसरे नेताओं को सौंपने का सुझाव देने लगे हैं. इसी क्रम में अभी-अभी 16 रिटायर्ड जजों , 14 पूर्व राजदूतों, 123 पूर्व नौकरशाहों और 133 रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों सहित कुल 272 हस्तियों ने खुला पत्र लिखकर निर्वाचन आयोग पर सवाल खड़ा करने को लेकर उन्हें निशाने पर लिया है. हालाँकि राहुल गांधी पर निशाना साधने के क्रम में 272 प्रबुद्धजनों का दांव उल्टा पड़ गया और यह गैंग खुद लोगों के निशाने पर आ गया है. लोग सवाल कर रहे हैं कि ग्लोबल जेंडर गैप द्वारा यह घोषणा की जा चुकी है कि महिला सशक्तिकरण के मामले में भारत बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार इत्यादि अत्यंत पिछड़े मुल्कों से भी ज्यादा पिछड़ चुका है और भारत की आधी आबादी को पुरुषों की बराबरी में आने में 250 साल से अधिक लगने हैं,लेकिन इस गैंग की आत्मा नहीं जागी; 2024 की ‘वर्ल्ड इनइक्वालिटी लैब’ के मुताबिक़ भारत के धन-दौलत पर 89 % कब्ज़ा उच्च वर्णों का हो चुका है और पिछड़े और दलितों की विशाल आबादी क्रमशः 9 और 2.8 % धन पर जीवन निवाह के लिए विवश है पर. इस असमानता को लेकर मोदी से कभी सवाल नहीं पूछे; आज मानव जाति की सबसे बड़ी समस्या ‘आर्थिक और सामाजिक विषमता’ के मामले में भारत वर्ल्ड टॉप हो चुका है पर, इसे देखकर इनकी आत्मा कभी जाग्रत नहीं हुई ; देश विश्व का नंबर एक कर्जदार देश बन चुका है पर, मोदी से इसे लेकर सवाल नहीं पूछे; कवि विष्णु नागर के शब्दों में ‘ इन्हें राहुल गांधी के सवाल तो सवाल नहीं ,षड्यंत्र का हिस्सा लग रहे हैं मगर चुनाव आयोग इन्हें लोकतंत्र का मंदिर लग रहा है?’ बहरहाल लोग इस गैंग से सवाल ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक-एक करके इन सबों का कच्चा चिटठा भी खोल रहे हैं. गैंग को पता था कि लोग उलटा उनसे ही सवाल कर सकते हैं, उनकी पोल-पट्टी खोल सकते हैं. बावजूद इसके वह राहुल गांधी को निशाने लेने के खुला पत्र लिख डाला !             

272 गैंग का खुला पत्र 

272 गैंग के पत्र में कहा गया है ,’ हम समाज के वरिष्ठ नागरिक हैं और इस बात पर चिंता जाहिर करते हैं कि भारत के लोकतंत्र पर हमला किया जा रहा है. ये हमला बल से नहीं, बल्कि इसकी संस्थाओं पर जहरीली बयानबाजी के जरिये किया जा रहा है. कुछ राजनेता कोई वास्तविक नीति विकल्प पेश किये बगैर अपनी नाटकीय राजनीतिक रणनीति में उकसावे और निराधार आरोपों का सहारा ले रहे हैं. भारतीय सशस्त्र बलों के साहस और उपलब्धियों पर सवाल उठाकर छवि ख़राब करने, न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाने , संसद और इसके पदाधिकारियों पर सवाल उठाने के बाद अब प्रतिष्ठा और इमानदारी पर षड्यंत्रकारी हमले झेलने की बारी भारत के निर्वाचन आयोग की है.’ जिस एसआईआर के जरिये निर्वाचन आयोग ने चुनाव को मजाक बनाते हुए भारतीय लोकतंत्र को विदाई की दहलीज पर पहुंचा दिया है, उसे प्रश्नातीत बताते हुए कहा गया है,’यहां तक घोषणा की गई है कि आयोग बेशर्मी के साथ भाजपा के ‘बी’ टीम के तौर पर काम कर रहा है . ऐसी बयानबाजी भावनात्मक रूप से ताकतवर हो सकती है, लेकिन जांच में यह नहीं टिकेगी, क्योंकि चुनाव आयोग ने सार्वजनिक रूप से एसआईआर का तरीका साझा किया है . इसकी निगरानी अदालत के बताये तरीकों से की गई है, अपात्र नामों को हटाया गया है और नए पात्रों को शामिल किया गया है. इससे पता चलता है कि ये आरोप संस्थागत संकट की आड़ में राजनीतिक हताशा छिपाने के लिए है.’ पत्र में राहुल गांधी के प्रयासों को बार-बार चुनावी असफलता और हताशा का परिणाम बताते हुए कहा गया है,’ जब राजनेता आम नागरिकों की महत्वाकांक्षाओं से दूर हो जाते हैं, तो वो अपनी विश्वसनीयता दोबारा बनाने के बजाय संस्थाओं पर भड़ास निकालते हैं. विश्लेषण की जगह नौटंकी ले लेती है. जनसेवा की जगह तमाशा होने लगता है. विडंबना यह है कि जिन कुछ राज्यों में विपक्ष की अगुवाई वाले दल सरकार बना लेते हैं, वहां चुनाव आयोग की आलोचना ख़त्म हो जाती है. जब कुछ राज्यों में उनके पक्ष में नहीं आता , तो आयोग विलेन हो जाता है.’ शेष में उन्होंने राजनेताओं से लोकतान्त्रिक फैसलों को गरिमापूर्ण तरीके से स्वीकार करने तथा और संवैधानिक प्रक्रिया को का सम्मान करने की अपील की है. कुल मिलाकर 272 जनों ने मोदी सरकार के हर फैसले को सही मानते हुए, उनका सम्मान करने का संदेश राहुल गांधी को देने का बलिष्ठ प्रयास किया है!  

हिन्दू धर्माधारित सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था से प्रेरित है: 272 समूह की सक्रियता! 

बहरहाल एसआईआर जरिए जो ज्ञानेश कुमार देश को चुनावी निरंकुशता की ठेल रहे हैं,उन के बचाव में क्यों आगे आए 272 प्रबुद्धजन! इसे लेकर लोगों की भिन्न – भिन्न राय है. अधिकांश लोगों का मानना है कि स्वहित या अपने रिश्तेदारों के हित में प्रधानमंत्री मोदी का कृपा- लाभ पाने के मकसद से ही 272 लोगों का समूह चुनाव आयोग के बचाव में उतरा है.ये मोदी-भक्त लोग हैं, इसलिए राहुल गांधी को निशाने पर ले रहे हैं. इसमें कोई शक नहीं कि इस समूह की सक्रियता के पीछे स्वार्थ छिपा है पर, वह तुच्छ नहीं वृहत्तर स्वार्थ है.इस समूह का माखौल उड़ाने यह बात भूल जाते हैं कि ये संभ्रांत लोग हैं, जिन्हें जीवन में यश और धन के उपभोग का पर्याप्त अवसर मिला है. ऐसे लोगो का कुछ बड़ा लक्ष्य भी हो सकता है, यह बात उनके आलोचक भूल गए.आलोचक यह भी भूल गए कि संघ – भाजपा का लक्ष्य हिन्दू राष्ट्र के जरिये हिन्दू धर्माधारित सामाजिक – आर्थिक व्यवस्था लागू करना रहा है.उसकी धर्माधारित सामाजिक – आर्थिक सोच से ही भाजपा प्रायः 90 % उच्च वर्ण लोगों की पसंदीदी पार्टी बन गई है.संघ – भाजपा आज अगर इतना विस्तार लाभ करने में सफल हुए हैं तो उसका एक खास कारण यह है कि उसके विरोधी अवाम के सामने संघ के सपनों के सामाजिक- आर्थिक व्यवस्था का स्वरुप उजागर करने से कोताही बरते. वे भाजपा की आलोचना मुख्यतः इस आधार पर करते रहे कि यह धर्मनिरपेक्षता का विरोधी और धार्मिक पोंगापंथ को बढ़ावा देने वाली पार्टी है. इस क्रम में वे यह बुनियादी तथ्य भी भूल गए कि किसी भी संगठन की एक सामाजिक आर्थिक- आर्थिक सोच होती है,जिसे जमीन पर उतारने के लिए ही वे अपनी गतिविधियाँ चलाते हैं. संघ कहने को तो एक अराजनैतिक संगठन रहा है ,लेकिन असल में में वह घोरतर राजनीतिक संगठन रहा , जिसका जन्मकाल से ही सपना हिन्दू धर्माधारित समाज- व्यवस्था को जमीन पर उतारना रहा . हालाँकि उसने इसकी घोषणा कभी नहीं की : घोषणा किया हिन्दू राष्ट्र की जिसमें हिन्दू धर्म के प्राणाधार वर्ण-व्यवस्था के विधानों के तहत देश चलाने की बात थी.संघ जिस वर्ण-व्यवस्था के द्वारा देश चलाने का आग्रही रहा , हिन्दू धर्माधारित वह वर्ण-व्यवस्था एक ऐसी सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था रही, जिसमें शक्ति के समस्त स्रोतों – आर्थिक,राजनीतिक, शैक्षिक, धार्मिक- के भोग के दैवीय- अधिकारी सिर्फ हिन्दू ईश्वर के उत्तमांग(मुख-बाहु-जंघे) से जन्मे ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य पुरुष रहे. इस व्यवस्था में दलित, आदिवासी, पिछड़े और आधी आबादी सहित प्रायः 92 % के लिए शक्ति के स्रोतों का भोग पूरी तरह अधर्म रहा. ऐसे में कहा जा सकता है कि हिन्दू/सनातन धर्म में प्रचंड रूप से आस्थाशील संघ अपने जन्मकाल से हिन्दू राष्ट्र के जरिये भारतवर्ष में एक ऐसी सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था को आकर देने पर अपनी गतिविधियाँ केन्द्रित रखा, जिसमें शक्ति के समस्त स्रोत 7.5% संख्या के स्वामी सवर्ण पुरुषों के लिए आरक्षित होता !                     

 सवर्णों के हाथ में शक्ति के समस्त स्रोत आरक्षित करने के मकसद से डॉ. हेडगेवार से लेकर गोलवलकर , डीडी उपाध्याय इत्यादि ने जो अक्लांत प्रयास किया ,उसके फलस्वरूप संघ की स्थापना के प्रयः 75 साल बाद उसके राजनीतिक संगठन भाजपा के हाथ में सत्ता आई और संघ प्रशिक्षित पहले प्रधानमंत्री बने अटल बिहारी वाजपेयी. वाजपेयी ने अपनी सम्पूर्ण क्षमता का इस्तेमाल हिन्दू राष्ट्र के निर्माण और शक्ति के समस्त स्रोत हिन्दू ईश्वर के उत्तमांग से जन्मे लोगों के हाथों में देने में किया.लेकिन हिन्दू राष्ट्र के सपने को लगभग शिखर तक पहुँचाने में कामयाब हुए संघ प्रशिक्षित दूसरे प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी! मोदी का धुआंधार पिछला ग्यारह साल हिन्दू राष्ट्र निर्माण का स्वर्णिम काल रहा, जिसमें उन ढेरों सरकारी उपक्रमों को औने-पौने दामों में बेचा गया, जहां वंचित जातियों को जॉब मिलता है; इस दौर में संविधान की बुरी तरह उपेक्षा करते हुए सवर्णों को 10% आरक्षण दिया गया ; इसी काल में लैटरल इंट्री के जरिये अपात्र सवर्णों को आईएएस जैसे पदों पर बिठाने का प्रावधान रचा गया और इसी काल में संघ अपने राजनीतिक संगठन भाजपा के जरिये जिस हिन्दू राष्ट्र के सामाजिक- आर्थिक विचार को जमीन पर उतारने का सपना अपने जन्मकाल से देखता रहा , उसके आसार इतने प्रबल हुए कि साधु- संतों ने उसके संविधान का प्रारूप 2025 के महाकुम्भ में जनसमक्ष ला दिया. इसे 12 महीने, 12 दिन में, 25 विद्वानों ने मिलकर तैयार किया है, जिसके पीछे चारों पीठ के शंकराचचार्यों की सहमति है.501 पन्नों के इस संविधान की निर्माण समिति में उत्तर भारत के 14 और दक्षिण भारत के 11 विद्वान शामिल किए गए हैं. संविधान निर्माण समिति ने धर्मशास्त्रों के साथ ही रामराज्य, श्रीकृष्ण के राज्य, मनुस्मृति और चाणक्य के अर्थशास्त्र का अध्ययन करने के बाद हिंदू राष्ट्र के संविधान को तैयार किया है. संविधान निर्माण समिति में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्वान भी शामिल रहे. इसके संरक्षक शांभवी पीठाधीश्वर के अनुसार 2035 तक हिंदू राष्ट्र की घोषणा का लक्ष्य रखा गया है. बहरहाल 2035 से जिस हिन्दू राष्ट्र के संविधान के जरिये संघ अपनी मनचाही सामाजिक आर्थिक व्यवस्था लागू करना चाहता है, उस हिन्दू राष्ट्र की राह में एवरेस्ट बनकर सामने आ गए राहुल गांधी!

 हिन्दू राष्ट्र की राह का अवरोध :राहुल गांधी 

भारत जोड़ो यात्रा के बाद जब राहुल गांधी फरवरी 2023 में रायपुर में आयोजित कांग्रेस के 85 वें अधिवेशन से सामाजिक न्याय का दामन थामे, उससे हिन्दू राष्ट्र की राह में एक बड़ा अवरोध खड़ा हो जायेगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की! चूंकि चुनाव को ठीक से सामाजिक न्याय पर केन्द्रित करने पर भाजपा हमेशा हार वरण करने के लिए अभिशप्त रहती है ,इसलिए राहुल गांधी ने रायपुर से शुरू किये गए सामाजिक न्याय के मिशन को जब 5 अप्रैल , 2024 को 5 न्याय , 25 गारंटियों और 300 वादों से युक्त कांग्रेस के घोषणापत्र के जरिये सामाजिक न्याय को शिखर पर पहुंचाया, मोदी के 400 पर के मंसूबों पर पानी तो फिरा ही , वह हारते- हारते भी बचे, जिसमें उनके तारणहार बने थे चुनाव आयुक्त राजीव कुमार! लोकसभा चुनाव बाद वित्तमंत्री सीतारमण के पति प्रकला प्रभारक सहित कई लोगों ने कहा कि केचुआ द्वारा 79 सीटों पर हेराफेरी नहीं किया गया होता इंडिया ब्लाक सत्ता में होता और राहुल गांधी होते पीएम! राहुल गांधी ने सामाजिक न्याय के एजेंडे के जोर से हिन्दू राष्ट्र के सपने को जमींदोज कर दिया है, इस बात को ध्यान में रखते हुए ही मोदी चुनाव आयोग के सहारे हारी हुई बाजी पलटने का योजना बनाये और हरियाणा तथा महाराष्ट्र में चमत्कार घटित करने में सफल हो गए! हिन्दू राष्ट्र की राह में राहुल गांधी के अवरोध को ध्यान में रखते हुए ही मोदी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को आगे करके देश के राजनीति की दिशा तय करने वाले बिहार से विशेष गहन संशोधन(एसआईआर ) की प्रक्रिया शुरू की. बिहार में एसआईआर शुरू होने से पहले राज्य में 7.89 करोड़ मतदाता थे . प्रक्रिया के बाद , अगस्त ,2025 में प्रकशित मसौदा सूची में 7.42 करोड़ मतदाता ही रह गए. यानी लगभग 65 लाख नाम हटा दिए गए , जिनमें 22 लाख मृत व्यक्ति थे. यहाँ ध्यान रहे कि हिन्दू धर्म के प्राणाधार वर्ण व्यवस्था में दलित, आदिवासी,पिछड़ों एवं महिलाओं का आर्थिक, शैक्षिक , धार्मिक की भांति ही शक्ति के एक और प्रमुख स्रोत : राजनीति का भोग अधर्म रहा,किन्तु उन्हें आंबेडकर के संविधान के जरिये राजनीतिक शक्ति के भोग का भी अवसर मिला. ऐसे में जब हिन्दुत्ववादी मोदी के संगी ज्ञानेश को एसआईआर के जरिये मतदाताओं की सफाई का अवसर मिला, निश्चय ही उनके निशाने पर शुद्रातिशूद्र आए होंगे. बहरहाल जब बिहार में एसआईआर के जरिये लाखों बहुजन मतदाताओं की सफाई का अवसर मिला , ज्ञानेश कुमार ने अक्तूबर के पहले सप्ताह में दर्जन भर राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया, जिसकी विपक्ष की ओर से जोरदार खिलाफत की गई .कई राज्यों के मुख्य मंत्रियों ने अपने राज्य में इसकी प्रक्रिया का बायकाट कर दिया. लेकिन विपक्ष के तमाम विरोध के बावजूद 12 राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया जारी है!

एसआईआर के जरिए ही पूरा हो सकता है:बहिन्दू राष्ट्र का ख्वाब      

एसआईआर के जरिये होने वाली क्षति की जो आशंका विपक्ष ने की थी, बिहार में उसका भयावह परिणाम 14 नवम्बर को सामने आ गया , जब एनडीए की अविश्वसनीय जीत के जरिये स्वाधीन भारत के चुनावी इतिहास में सबसे बड़ा उलट फेर हुआ. बिहार चुनाव के बाद विपक्ष ने विरोध का नया इतिहास रचा. इसी क्रम में आगे चलकर कांग्रेस ने दिसंबर के पहले सप्ताह में रैली करने की घोषणा के जरिये एसआईआर के खिलाफ आरपार की लड़ाई का एलान कर दिया, जिसके बाद 272 का समूह सक्रिय हुआ. वह इसलिए कि राहुल गांधी जाति जनगणना के बाद शक्ति के स्रोतों में जितनी आबादी- उतना हक़ लागू करने के जरिये सामाजिक न्याय की राजनीति को जो बड़ी उंचाई दे दिए हैं, उससे मोदी अब आगे चुनाव ही नहीं जीत पाएंगे. चुनाव जीत पाएंगे तभी जब एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होगी. ऐसे में कहा जा सकता है कि न्याययोद्धा राहुल गांधी द्वारा सामाजिक न्याय की राजनीति को शिखर प्रदान करने के बाद हिन्दू राष्ट्र का सपना खटाई में पड़ गया है. अब सिर्फ एसआईआर के जरिये ही हिन्दू राष्ट्र का ख्वाब पूरा हो सकता है, इसलिए जिस केचुआ के द्वारा एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, उसके बचाव में ही सवर्ण समाजों के विशिष्ट जन खुला पत्र के जरिये मैदान में कूद पड़े हैं. लेकिन गैंग 272 को निशाने पर लेने के पहले संघ विरोधी बुद्धिजीवियों को यह बात गांघ बाँध लेनी पड़ेगी कि जिस मकसद से यह गैंग सक्रिय हुआ है,वही मकसद हिन्दू ईश्वर के उत्तमांग से जन्मे 99.9 % लोगों का है!     

(लेखक बहुजन डायवर्सिटी मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं)

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