Bihar Election News : भाजपा का बेनकाब चेहरा 

Bihar Election News: भाजपा सिर्फ हिन्दू के नाम पर पिछड़ी, दलित और आदिवासी समुदायों को इस्तेमाल कर रही है। भाजपा जो हिंदुत्व के नाम पर पिछड़ी और दलित जातियां का वोट लेकर सत्ता में बनी है, उन पिछड़े और दलित जातियों को हाशिए पर रखना चाहती है। 

 

लेखक: अलखदेव प्रसाद ‘अचल’

न्यूज इंप्रेशन 

Bihar: भाजपा के अंदर कथनी और करनी की परंपरा शुरू से ही रही है। वह शुरू से ही छल छद्म के सहारे सत्ता में पहुंचने की जुगत में लगी रहती थी। इसमें 2014 में पूर्ण कामयाबी भी मिल चुकी थी। अब धीरे-धीरे सभी जान गए हैं कि भाजपा के नेता कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं। जब 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हमारी सरकार बनेगी, तो सभी के खाते में काले धन के 15-15 लाख रुपए हर परिवार के खाते में जायेंगे। हमारी सरकार प्रतिवर्ष 2 करोड़ बेरोजगारों को नौकरियां देगी। ऐसे ऐसे बहुत सारे वादे किए थे, परंतु सब जुमले सिद्ध हुए। क्योंकि भाजपा को करना नहीं है, बल्कि उसे आम जनता को सिर्फ प्रलोभन की जाल में फंसाकर यहां के कारपोरेटों से सांठ-गांठ कर सिर्फ सत्ता में बने रहना है। उसे इसकी भी परवाह नहीं है कि देश रसातल में चल जाएगा। खुद भाजपाइयों का चकलस रहना चाहिए। उस भारतीय जनता पार्टी से कोई विकास की उम्मीद रखता है, तो यह उसकी मूर्खता ही है। यही कारण है कि 2014 के बाद जब से भाजपा की सरकार बनी है, उसने एक भी काम ऐसा नहीं किया है, जिसपर देशवासी गर्व कर सकें। उसकी प्रशंसा की जा सके। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जो बोलता है कि भारत का पूरे विश्व में डंका बज रहा है, यह पूरी तरह से झूठ है। भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल में न कोई बड़ी फैक्ट्री लगवा सकी और न ही कहे अनुसार बेरोजगारों को नौकरियां ही दे सकी। जबकि ऐसा भी नहीं है कि भिन्न-भिन्न विभागों में रिक्तियां नहीं है। पर भाजपा की नीयत में खोट है। सत्ता में कैसे बने रहें और आगे कैसे बने रहेंगे, रात दिन इसी के बारे में सोचा करती है। इसीलिए सिर्फ हिंदुओं और मुसलमानों के बीच नफरत फैलाती रहती है, ताकि हिन्दू उस नाम पर गोलबंद होकर वोट देते रहें।भाजपा का यह चेहरा अब सभी लोग समझने लगे हैं। फिर भी जो अंध भक्त हैं, वैसे लोग अंधभक्ति में उसके साथ जुड़े हुए हैं।

भाजपा पिछड़ी, दलित व आदिवासी समुदायों को कर रही इस्तेमाल

वैसे भाजपा का शीर्ष नेतृत्व हमेशा से यह कहते रहा है कि भाजपा सबका साथ और सबका विकास वाली पार्टी है। जो बिल्कुल ही गलत है। भाजपा सबका साथ लेना तो चाहती है, ले भी रही है, परंतु सभी का विकास करना नहीं चाहती है। भाजपा सिर्फ हिन्दू के नाम पर पिछड़ी, दलित और आदिवासी समुदायों को इस्तेमाल कर रही है। भाजपा जो हिंदुत्व के नाम पर पिछड़ी और दलित जातियां का वोट लेकर सत्ता में बनी है, उन पिछड़े और दलित जातियों को हाशिए पर रखना चाहती है। यही कारण है कि भाजपा ने देश सारे विश्वविद्यालयों में कुलपति से लेकर प्रोफेसरों तक की बहाली में सब वर्णों को ही बैठाया है। जो इग्गि-दुग्गि पिछड़ी और दलित जातियों के हैं भी, वे आर एस एस से जुड़े हुए लोग हैं। जो अपने समाज के हित के लिए नहीं सोच सकते हैं।

इस विस में भी भाजपा का असली चेहरा सामने आ गया 

भाजपा यह भली भांति जानती है कि यहां पिछड़े, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक जातियों की संख्या 90% हैं। ऐसी स्थिति में जब तक उन्हें घुटने पर नहीं लाया जाएगा, तब तक हम 10% लोग सत्ता पर काबिज नहीं रह सकते हैं। भाजपा को न यहां के 90% लोगों के हित की चिंता रही है, न आज है। इसी के तहत भाजपा संविधान को भी बदलना चाहती है। परंतु अंधभक्ति में अपने को दलित-पिछड़े हिंदू कहने वाले लोग भी समझ नहीं पा रहे हैं।जिसका खामियाजा वे लोग तो भुगत ही रहे हैं, उनके वर्ग के लोग भी भुगत रहे हैं। अभी बिहार विधानसभा का चुनाव है। इस विधानसभा में भी भाजपा का असली चेहरा सामने आ गया है। पिछड़ी जातियों के लोगों के मन में यह धारणा है कि अब बिहार में भाजपा नित्यानंद राय या सम्राट चौधरी जैसे लोगों के हाथों में नेतृत्व देना चाहती है। ऐसे तो संभावना लग नहीं रही है।अगर नेतृत्व दे भी देती है, तो उनके पास कोई पावर नहीं रहेगा। ऊपर का शीर्ष नेतृत्व के इशारे पर ही उन्हें चलना होगा। जैसे मध्य प्रदेश में मोहन यादव, हरियाणा में नायाब सिंह सैनी चला रहे हैं। उन्हें कोई भी स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार नहीं रहेगा, जैसे उन लोगों को स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार नहीं है।

27% आरक्षण देने की घोषण पर सवर्ण जातियों ने उन्हें गालियाना शुरू कर दिया

 मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछड़ी जातियों को 27% आरक्षण देने की घोषणा क्या कर दी कि भाजपा के अंदर के सवर्ण जातियों ने उन्हें गालियाना शुरू कर दिया। बिहार में नित्यानंद राय या सम्राट चौधरी जैसे लोग अगर मुख्यमंत्री कहीं बन भी जायेंगे, तो वे सिर्फ मुख्यमंत्री का सुख ही भोगेंगे, स्वतंत्र निर्णय नहीं ले सकेंगे। इसे आप इस रूप में समझ सकते हैं कि भाजपा एनडीए गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है। अपने गठबंधन के साथ वह 101 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिसमें 10% सवर्णों को 49 सीटें दी है और 52 सीटों में पूरे 90% जातियों को सीटें दी हैं। इसी से भाजपा की असली मानसिकता को समझा जा सकता है। कि वह क्या चाहती है। भाजपा अगर पिछड़ी और दलित जातियों को किसी पद पर बैठाती भी है, तो सिर्फ दिखावे के रुप में ही। अगर कहीं भाजपा की सरकार बन भी जाएगी, तो सरकार में किसका दबदबा होगा, किसका अधिक से अधिक काम होगा, किसका अधिक लाभ होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। यह ठीक है कि कांग्रेस आज दलित और पिछड़ों की बात कर रही है, परंतु कांग्रेस भी कभी वही थी। 

और फिर घुसपैठिए-घुसपैठिए सिर्फ चुनाव में ही क्यों 

बिहार चुनावी सभा को संबोधित करने कभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आ रहे हैं, कभी गृह मंत्री अमित शाह आ रहे हैं।जो अपने भाषण के दौरान यह नहीं कह पा रहे हैं कि हमने इतने सालों में बिहार के लिए क्या-क्या किया और अगर हमारी पूर्ण बहुमत की सरकार बन जाएगी, तो हम आगे बिहार के विकास क्या-क्या करेंगे। कितनी फैक्ट्रियां लगायेंगे। इसके बजाय समाज में नफरत की आग उगलते हुए कभी घुसपैठिए की बातें कर रहे हैं, तो कभी लालू राबड़ी राज की बातें कर रहे हैं।कभी कांग्रेस का बखिया उड़ेल रहे हैं।अरे भाई, केन्द्र की सत्ता में तुम हो, तो अपनी उपलब्धियों की बात न करनी चाहिए? और तो और, नरेन्द्र मोदी और अमित शाह बातें भी करते हैं, तो बहुत ही बेशर्मी के साथ बातें करते हैं। बेशर्मी के साथ इस रूप में कि अगर बिहार घुस बैठिए आ रहे हैं, तो ऐसा नहीं है कि राजद की सरकार में आ गए थे।उसी समय के सारे घुसपैठिए हैं। अगर कहीं बांग्लादेश से घुसपैठिए आ रहे हैं, तो गृह मंत्री तुम हो, उन्हें रोकने का सारा अधिकार तुम्हारे पास है, तो तुम क्या कर रहे हो? और फिर घुसपैठिए -घुसपैठिए सिर्फ चुनाव में ही क्यों तुझे याद आता है? बाकी दिन याद क्यों नहीं रहते हैं? यही है भाजपा का असली चेहरा, जिसे लोग समझ नहीं पा रहे हैं। इसे ही समझने की जरूरत है।और जो लोग समझने लगे हैं, वह बेनकाब करने में भी लगे हुए हैं। आम जनता को भी भाजपा के असली चरित्र को समझने की जरूरत है, अन्यथा देश का भविष्य चौपट हो जाएगा।  

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