Mock Drill in BSL Plant: BSL में आपदा की स्थितियों से निपटने के लिए एनडीआरएफ ने कराया मॉक ड्रिल, गैस रिसाव का काल्पनिक अलार्म बजाया
Mock Drill in BSL Plant: आपात स्थितियों ने निपटने के लिए बीएसएल प्लांट में सीबीआरएन इमरजेंसी लेवल-3 मॉक ड्रिल का आयोजन, औद्योगिक क्षेत्र में गैस रिसाव का काल्पनिक अलार्म बजाया गया
न्यूज इंप्रेशन, संवाददाता
Bokaro: जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से गुरूवार को बोकारो स्टील लिमिटेड प्लांट (बीएसएल) में औद्योगिक आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी का आकलन करने के उद्देश्य से केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (सीबीआरएन) आधारित वृहद पैमाने पर मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। मौके पर डीडीएमए के अध्यक्ष सह उपायुक्त अजय नाथ झा मौजूद थे। मॉकड्रिल में बीएसएल प्रबंधन के कई अहम विभागों के साथ-साथ जिला प्रशासन, एनडीआरएफ की 9वीं बटालियन, एसडीआरएफ, सीआईएसएफ और फायर सर्विस जैसी प्रमुख आपदा प्रबंधन एजेंसियां शामिल हुईं।
गैस रिसाव का काल्पनिक अलार्म बजाया
यह मॉकड्रिल एक काल्पनिक गैस रिसाव की स्थिति को ध्यान में रखते हुए की गई ताकि वास्तविक परिस्थितियों में जिले, संयंत्र व एजेंसियों की सामूहिक क्षमता और तत्परता का मूल्यांकन किया जा सके। सुबह लगभग 11 बजे बीएसएल के तय औद्योगिक क्षेत्र में गैस रिसाव का काल्पनिक अलार्म बजाया गया। अलर्ट मिलते ही गैस सेफ्टी (ईएमडी), ब्लास्ट फर्नेस, सेफ्टी विभाग, प्लांट कंट्रोल, बीएसएल मेडिकल सर्विसेज, बीएसएल सुरक्षा की टीमें निर्धारित एमओपी के अनुसार तुरंत सक्रिय हो गईं। इसी के साथ जिला प्रशासन, सीआइएसएफ, फायर सर्विस व एनडीआरएफ की टीमों को भी सूचना भेजी गई, जिन्होंने कुछ ही मिनटों में घटनास्थल पर पहुंचकर मोर्चा संभाला।
लाभकारी निवेश के रूप में अपनाया जाना चाहिए
मौके पर उपायुक्त ने कहा कि उद्योगों में सुरक्षा को केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि लाभकारी निवेश के रूप में अपनाया जाना चाहिए। सेफ्टी इज कास्ट इफ़ेक्टिव-यह सिद्धांत आज के औद्योगिक वातावरण में पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। सुरक्षा उपायों पर किया गया निवेश न केवल दुर्घटनाओं को रोकता है, बल्कि उत्पादन क्षमता, श्रमिकों के मनोबल और उद्योग की विश्वसनीयता को भी बढ़ाता है। उन्होंने भविष्य के लिए सुझाव देते हुए कहा कि ऐसी कोई भी स्थिति नहीं होनी चाहिए, जहां सुरक्षा से समझौता किया जाए। एसपी हरविंदर सिंह ने कहा कि मॉक ड्रिल का संचालन प्रभावी ढ़ंग से हुआ और सभी विभागों ने बेहतर तालमेल दिखाया।
एजेंसियों ने निभाई अपनी जिम्मेदारियां
मॉकड्रिल का मुख्य उद्देश्य था सूचना संप्रेषण प्रणाली की गति, विभिन्न एजेंसियों के बीच इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन, परिचालन (ऑपरेशनल) तैयारी, कमांड चेन का पालन, मेडिकल इमरजेंसी रिस्पांस, एंबुलेंस व अस्पतालों की तैयारियां, सुरक्षा घेरा व एंट्री-एक्ज़िट प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की वास्तविक समय में परख करना। अभ्यास के दौरान सभी एजेंसियों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निर्धारित समय पर निभाई। मॉकड्रिल लगभग डेढ़ घंटे तक चली।
ये थे मौजूद
इंसिडेंट पोस्ट पर डीसी-एसपी, डीडीसी शताब्दी मजूमदार, अधिशासी निदेशक (वर्क्स) प्रिय रंजन, अधिशासी निदेशक (ऑपरेशन) अनूप कुमार दत्त, चास एसडीएम प्रांजल ढ़ांडा, इंसिडेंट पदाधिकारी प्रभाष दत्ता, डीडीएमओ शक्ति कुमार, सिविल सर्जन डॉ ए बी प्रसाद, एएमसी संजीव कुमार, डीपीआरओ रवि कुमार, सीआईएसएफ और एनडीआरएफ के 9वीं बटालियन के वरीय अधिकारी सहित बीएसएल और जिला प्रशासन के वरीय अधिकारी मौजूद रहे।
प्रदर्शित की गयी उच्च स्तरीय तकनीकी क्षमता
एनडीआरएफ की 9वीं बटालियन ने मौके पर ही गैस डिटेक्शन तकनीक, डी-कंटेमिनेशन प्रक्रिया, प्रभावित कर्मियों की निकासी, संरक्षित कार्य के प्रोटोकॉल का लाइव प्रदर्शन किया। सीआइएसएफ ने क्षेत्र को सुरक्षा घेरा प्रदान किया, एंट्री-एग्ज़िट पॉइंट्स नियंत्रित किए और परिधि सुरक्षा की सम्पूर्ण जिम्मेदारी संभाली। सिविल डिफेंस के सदस्यों ने भी अपनी भूमिका अदा की। मॉकड्रिल समाप्त होने के बाद पर्यवेक्षकों और विशेषज्ञों की समीक्षा बैठक की। बैठक में अधिकारियों ने भविष्य में और बेहतर तैयारी के लिए सुझाव प्रस्तुत किए। वर्ष 2023 के बाद लगभग दो वर्षों के अंतराल पर आयोजित इस अभ्यास ने जिला प्रशासन व बीएसएल की संयुक्त आपदा प्रबंधन तैयारी को फिर से मजबूत किया।
कई कॉप्शनियों के अधिकारी थे शामिल
मौके पर विभिन्न कंपनियों डीवीसी-सीटीपीएस, डीवीसी- बीटीपीएस, सीसीएल कथारा, डालमिया सिमेंट, ओएनजीसी, वेदांता समेत अन्य कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। इस्पात संयंत्र होने के नाते ये एक थर्मो-सेंसिटिव इकाई है, जहाँ रासायनिक खतरों के तत्व विद्यमान होते है। इसी के मद्देनज़र एनडीआरएफ समय-समय पर यहां सीबीआरएन मॉकड्रिल अभियान चलाती है।

