Bokaro Treasury News: वेतन मद में ट्रेज़री से 4.29 करोड़ के फर्जी निकासी में एकाउंटेंट गया जेल 

Bokaro Treasury News: सेवानिवृत्ति हवलदार उपेंद्र सिंह के नाम का फर्जी इस्तेमाल कर वेतन मद में ट्रेज़री से 4 करोड़ 29 लाख 71 हजार सात रूपए के अवैध निकासी में मंगलवार को एसपी के एकाउंटेंट कौशल कुमार पांडे को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया जेल

न्यूज इंप्रेशन, संवाददाता 

Bokaro: बोकारो जिला बल से वर्ष 2016 में सेवानिवृत्ति हवलदार उपेंद्र सिंह के नाम का फर्जी इस्तेमाल कर वेतन मद में ट्रेज़री से 4 करोड़ 29 लाख 71 हजार सात रुपये के अवैध निकासी में मंगलवार को एसपी के एकाउंटेंट कौशल कुमार पांडे को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। ट्रेज़री ऑफिसर गुलाबचंद उरांव की शिकायत प्रतिवेदन पर सिटी पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। मालूम हो कि प्रधान महालेखाकार चंद्रमौली सिंह के ट्रेज़री निरीक्षण से इस घोटाले का खुलासा हुआ, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट उन्होंने वित्त सचिव प्रशांत कुमार को भेजी थी। 

रिटायर्ड हवलदार के नाम का गलत इस्तेमाल कर राशि की निकासी

डीसी अजय नाथ झा व एसपी हरविंदर सिंह ने अपने अपने स्तर से अधीनस्थ अधिकारी से जांच करवाई। एसपी को जो जांच रिपोर्ट सौंपी गई, उसने इस बात की पुष्टि हुई कि रिटायर्ड हवलदार के नाम का गलत इस्तेमाल कर वर्ष 2023 नम्बर से अबतक कुल 63 ट्रांजेक्शन में उक्त राशि की निकासी की गई, जो एसपी के आरोपी एकाउंटेंट की पत्नी अनु पांडे के एकाउंट में ट्रांजेक्शन हुआ, फिर आरोपी के एकाउंट में भेजा गया। एसपी ने कहा कि चूक हुई है, अधिकारियों के विश्वास का फायदा उठाकर एकाउंटेंट ने ये घोटाला लंबे समय तक किया। मामले में कई स्तर पर चूक की गुंजाइश संभावित है, ऐसे में एकाउंटेंट का जेल जाना प्रारंभिक जांच के आधार पर कार्रवाई का हिस्सा है। आगे इस मामले में विस्तृत जांच होनी है। सरकार के खजाने में रखे आम नागरिक के रुपए के इस अवैध निकासी में कोई भी दोषी नहीं बचेगा। डीसी अजय नाथ झा ने भी मामले में उपविकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार के नेतृत्व में उच्चस्तरीय जांच के लिए चार सदस्यीय टीम का गठन किया गया है।

 नामित डीडीओ की भूमिका संदेह के घेरे में

पुलिस मैनुअल के हिसाब से एसपी जिले के डीडीओ होते है, पर विधि व्यवस्था संधारण की व्यस्तता की वजह से वो एकाउंट की जानकारी रखने वाले डीएसपी स्तर के पुलिस अधिकारी को डीडीओ के लिए नामित करते है। जिनके हस्ताक्षर से से पुलिस विभाग के किसी भी मद की राशि ट्रेज़री से निकासी होती है। एकाउंटेंट के हस्ताक्षर वाले वेलेस सीट की जांच के उपरांत डीडीओ को अंतिम हस्ताक्षर करना होता है। ट्रेज़री ऑफिसर के यहां से डीडीओ के आईडी पर ओटीपी जेनरेट होती है, जिसे बताने के बाद ही राशि की निकासी संभव हो पाती है। जिला बल में एसपी से लेकर सिपाही तक के वेतन मद का मास्टर शीट पुलिस केंद्र में बनता है, जिसकी जांच के उपरांत उसे फाइनल किया जाता है। ऐसे में एकाउंटेंट का जेल जाना प्रारंभिक कार्रवाई हो सकती है। इस घोटाले के लिए जिले में मुख्यालय डीएसपी के तौर पर 2023 नवंबर से अबतक के तमाम डीडीओ जांच के दायरे में है। क्योंकि 25 माह में 63 ट्रांजिशन किया गया और हर माह 15 लाख से अधिक की राशि एक हवलदार के वेतन मद को दर्शाते हुए निकासी की गई है। लगभग दो वर्ष के अंतराल में इस घोटाले पर डीडीओ की नजर कैसे नहीं गई, जांच का विषय है। रिटायर्ड हवलदार के डाटा से छेड़छाड़ कर एकाउंट जेनरेट कर घोटाला किया, इस मामले में झारनेट में छेड़छाड़ हुई होगी। जांच एजेंसी इस बिंदु पर भी जांच करेगी।

आरोपी एकाउंटेंट की बहाली अनुकंपा पर 

आरोपी एकाउंटेंट बिहार के पटना गोला टी प्वाइंट दानापुर मूल का निवासी है, जो वर्ष 2018 में पलामू जिला बल से स्थानांतरित होकर बोकारो जिला बल में योगदान दिया था। इनके पिता भी पुलिस विभाग में सेवारत थे। आरोपी एकाउंटेंट की बहाली अनुकम्पा पर कलर्क में हुई थी। एकाउंट की जानकारी होने के चलते उसे एकाउंटेंट की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। 

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