कुवैत में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स गेम में 800 मीटर की दौड़ में आशा ने गोल्ड मेडल हासिल कर बनाया नया रिकॉर्ड, बढ़ाया झारखंड के साथ बोकारो थर्मल का नाम

आशा ने कहा—2024 में पेरिस में आयोजित ओलंपिक में गोल्ड मेडल जितने का है लक्ष्य

Bermo : झारखंड के गुमला जिला के नावाटांड कामडारा ब्लाक निवासी रोजरिया एड की आठ बच्चों में तीसरे नंबर की पुत्री आशा किरण बारला ने कुवैत में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स गेम में 800 मीटर की दौड़ को मात्र 2 मिनट 6 सेकेंड में पूरा किया। इसके साथ ही पुराने रिकार्ड होल्डर चायना की धाविका का रिकॉर्ड तोड़ते हुए विश्व रिकॉर्ड बनाकर गोल्ड मेडल हासिल किया। विदेश से लौटने के दौरान रांची एयर पोर्ट पर राज्य के कई मंत्रियों ने सम्मान किया। मालूम हो कि गोल्ड मेडलिस्ट आशा बोकारो थर्मल के एक छोटे से स्पोर्ट्स एकेडमी में प्रशिक्षण ले रही है। विदेश में गोल्ड मेडल जितने के बाद वह सीधा अपने बोकारो थर्मल प्रशिक्षण केंद्र भाटिया एथलेटिक्स एकेडमी सेन्टर पहुंची।

झारखंड में प्रतिभा की कमी नहीं:

एकेडमी के संस्थापक आसू भाटिया और केन्द्र में मौजूद बच्चों और बच्चियों ने उनका भव्य स्वागत किया। इसकी खबर क्षेत्र में फैलते ही बोकारो थर्मल स्थित भाटिया एथलेटिक्स एकेडमी ट्रस्ट (केंद्र) पर बधाई देने वालों की भीड़ लगने लगी। सेन्टर के संस्थापक सह एक्स आर्मी मैन आसू भाटिया ने कि बताया कि आशा पिछले पांच वर्षों से उनके नेतृत्व में प्रशिक्षण हासिल कर रही है। उन्होंने बताया कि बारला की बड़ी बहन फोरोलेश बारला 2020 मे उज्बेकिस्तान में आयोजित एथलेटिक्स गेम में 400 मीटर की दौड़ में गोल्ड मेडल जीत चुकी है और फिलवख्त वह इस प्रशिक्षण केंद्र की कैप्टन है। उन्होंने कहा झारखंड में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरुरत है उसे प्रोत्साहन देने की। कहा कि हमारे यहां संसाधनों की कमी है।

सीसीएल और डीवीसी करते हैं सहयोग:

सीसीएल और डीवीसी के मैदानों को वे प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल करते हैं। दोनों ही कंपनियों के अधिकारी उनका सहयोग करते हैं, मगर हमारे पास एथलेटिक्स कीट का अभाव है। कहा कि अगर उनके केंद्र को संसाधन युक्त कर दिया जाये तो यहां के शत प्रतिशत बच्चें और बच्चियां गोल्ड मेडल जीतने का दम रखते हैं। यहां के बच्चे और बच्चियों को प्रतिदिन 10 से 12 घंटे प्रशिक्षण दिया जाता है। समय समय पर उनका डाक्टरों से जांच भी करवाई जाती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के जितने भी गोल्ड मेडल विजेता बच्चें व बच्चियां हैं, उनके लिए उनके एकेडमी में मुफ्त रहना, खाना, पढ़ना और प्रशिक्षण की विशेष व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि कुछ बच्चों से पैसे लेकर तथा अपने निजी मद से पैसे लगा आज 55 बच्चें और बच्चियों को मुफ्त खाना, रहना, पढ़ना व प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

बचपन में ही हो गया था पिता का निधन :

जबकि गोल्ड मेडल विजेता सह एसिया रिकार्ड होल्डर आशा किरण बरला ने अपनी जीत का श्रेय आसू भाटिया को दिया। कहा कि उनका मिशन 2024 का ओलंपिक है जो पेरिस में होना है, इसमें गोल्ड मेडल जीत कर लाना है और देश, प्रदेश व एकेडमी का नाम रौशन करना है। कहा कि उसके बाल अवस्था में ही उनके पिता का निधन हो गया। मां पर आठ बच्चों के परवरिश का भार आ गया। ऐसे में आसू सर जैसे व्यक्ति ने हमे और हमारी बहन को सहारा दिया। और आज इस लायक बनाया कि देश, प्रदेश ही नहीं पूरा एशिया महादेश के लोग जानने लगे हैं। वह 2018 से लगातार इसी एकेडमी से जुड़ी रही। यहीं के प्रशिक्षण के दम पर आज यह मकाम हासिल किया। छोटे बड़े मेडलों का ढेर था। दर्जनों मेडल उन्होंने प्रखंड, जिला, राज्य और देश स्तर पर जीती हैं।

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